अभी ईरान के टेलीवीजन चैनल ने आतंकवादी संगठन तुंदर के सरगना जमशीद शारमेह्द की गिरफ़्तारी की सूचना दी ही थी कि अमरीकी, इस्राईल और सऊदी अधिकारियों ने इस ख़बर में शक करना शुरु कर दिया क्योंकि इन्हीं लोगों ने शारमेह्द को कुछ ज़िम्मेदारियां सौंपी थीं। पहले तो यह शक हुआ कि यह फ़ोटो कहां की है, ईरान की है या बाहर की, और जब अपने मोहरे के पिटने का विश्वास हो गया तो अमरीकी विदेशमंत्रालय के बयान में बल दिया गया कि उनका एक लड़ाका ईरानियों के चंगुल में है।
अमरीका को हक़ है इस प्रकार की बातें करने का, क्योंकि इस ख़तरनाक आतंकी संगठन के सरग़ना ने बहुत से ईरानियों को मौत की नींद सुला दी थी, उनको दुख होना तो स्वभाविक सी बात है, आतंकवादी संगठन तुंदर के सरगना जमशीद शारमेह्द ने 12 साल पहले शीराज़ के एक इमामबाड़े में आतंकी कार्यवाही की योजना तैयार की और इस हमले में 14 लोग शहीद और 215 घायल हुए। इस घटना में शहीद और घायल होने वाले सभी इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शोक सभा में शामिल थे।
आतंकवादी संगठन तुंदर के सरगना जमशीद शारमेह्द ने पिछले वर्षों के दौरान कई आतंकी कार्यवाहियां कीं जिनमें शीराज़ के बांध में धमाके की योजना तेहरान अंतर्राष्ट्रीय किताब मेले में केमिकल बम के धमाके की योजना और इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह के मज़ार पर धमाके का कार्यक्रम इत्यादि शामिल है, यह सभी कार्यवाहियां सुरक्षा बलों की होशियारी से विफल रहीं।
रोचक बिन्दु यह है कि आतंकवादी संगठन तुंदर के सरगना जमशीद शारमेह्द ने इन सारे अपराधों की ज़िम्मेदारी स्वीकार की और कहा कि वह ईरान में हर काम करने की ताक़ रखता है, उसने इस बात पर गर्व भी किया कि वह विदेशियों का एजेन्ट है।
अब अमरीका दूसरे देशों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों का सम्मान करने का पाठ सिखा रहा है, उनकी नज़र में अंतर्राष्ट्रीय मानक हैं क्या?
अगर उनका मक़सद आतंकवादियों के साथ इंसाफ़ करना है तो ईरान ने हमेशा से पहले क़ानूनी कार्यवाही की है और उसके बाद न्यायालय द्वारा निर्धारित सज़ा दी है। एमकेओ आतंकवादी संगठन के गिरफ़्तार आतंकियों को जिन्होंने 17 हज़ार ईरानियों की हत्या की है, पहले क़ानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ता है और फिर उन्हें सज़ा दी जाती है। यहां पर यह भी बताते चलें कि ईरान में गिरफ़्तार आतंकियों का वीडियो टेप टीवी पर प्रसारित किया जाता है और वे ख़ुद अपने अपराधों को स्वीकार करते हैं।