1 अगस्त 2020 - 18:44
ट्रम्प के ट्वीट्स के ख़िलाफ़ कार्यवाही और ईरानी सुप्रीम लीडर के ट्वीट्स का स्वागत, व्हाइट हाउस की आपत्ति पर ट्विटर का जवाब

व्हाइट हाउस ने ट्वीटर पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के ट्वीट्स के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने और ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनई के ट्वीट्स के ख़िलाफ़ कोई एक्शन नहीं लेने के लिए दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता केली मैकनेनी ने शुक्रवार को ट्रम्प के भेदभावपूर्ण और हिंसा भड़काने वाले ट्वीट्स का बचाव करते हुए ट्विटर पर दोहरी नीति का आरोप लगाया और दावा किया कि ट्रम्प प्रशासन ने इसमें सुधार के लिए ज़रूरी क़दम उठाए हैं।


मैकनेनी ने ट्रम्प के कुछ ट्वीट्स के ख़िलाफ़ कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां क्या कर रही हैं? वह ट्रम्प के ट्वीट्स की तो समीक्षा करती हैं, लेकिन आयतुल्लाह ख़ामेनई के इस्राईल विरोधी ट्वीट्स की कोई समीक्षा नहीं करतीं।   

ट्विटर के एक अधिकारी ने इस्राईली संसद नेसेट को बताया कि ईरानी सुप्रीम लीडिर के इस तरह के ट्वीट्स से कंपनी के नियमों का उल्लंघन नहीं होता है और उनके इस तरह के ट्वीट्स को "विदेश नीति" का हिस्सा माना जाता है।

अमरीका में पुलिस के हाथों सरेआम एक काले युवक जॉर्ज फ़्लॉयड की निर्मम हत्या के बाद भेदभाव के ख़िलाफ़ शुरू हुए प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने कई ट्वीट किए थे, जिनमें से कुछ पर ट्विटर ने पहली बार 29 मई को सावधानी वाली चेतावनी लगा दी थी।

उसके बाद भी ट्रम्प ने भेदभाव वाले और हिंसा को भड़काने वाले दो ट्वीट किए थे, जिन्हें ट्विटर ने छिपा दिया था।

उस वक़्त भी ट्रम्प प्रशासन ने ट्विटर पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया था, हालांकि सोशल मीडिया कंपनी ने अपना बचाव करते हुए कहा था कि ट्रम्प लोगों को नुक़सान पहुंचाने वाले और भड़काऊ ट्वीट कर रहे हैं, जबकि ईरानी लीडर के ट्वीट राजनीति मुद्दे और विदेश नीति पर आधारित होते हैं।

वास्तव में अमरीकी सोशल मीडिया वेबसाइट्स फ़ेसबुक हो या ट्विटर, ईरानी मीडिया और अधिकारियों के हर साल बिना किसी कारण सैकड़ों अकाउंट ब्लॉक कर देते हैं और यह सब वाशिगंटन और तेल-अवीव के दबाव में होता है, जिसे वह खुलेआम स्वीकार भी कर चुके हैं।

इसलिए सोशल मीडिया साइटों पर दोहरी नीति का आरोप किसी हद तक सही है, लेकिन वह कभी भी अमरीका विरोधियों के पक्ष में नहीं, बल्कि उनके ख़िलाफ़ ही क़दम उठाती हैं।