उन्होंने कहा कि वायुसेना की ताक़त में इससे क्रांतिकारी बढ़ोतरी होगी। उनका कहना था कि सेना के इतिहास में नए युग की शुरुआत हुई है। भारत के रक्षामंत्री ने कहा कि अब देश के दुश्मनों को सोचना होगा।
उधर फ्रांस से पांच राफ़ेल विमानों की पहली खेप पहुंचते ही कांग्रेस ने एक बार फिर इसकी क़ीमत को सार्वजनिक करने की मांग की है।
कांग्रेस महासचिव एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि एक राफ़ेल की क़ीमत कांग्रेस सरकार ने 746 करोड़ रुपये तय की थी लेकिन “चौकीदार” महोदय कई बार संसद में और संसद के बाहर भी मांग करने के बावजूद आज तक एक राफ़ेल कितने में ख़रीदा है, बताने से बच रहे हैं। क्यों? क्योंकि चौकीदार जी की चोरी उजागर हो जायेगी!! “चौकीदार” जी अब तो उसकी क़ीमत बता दें।'
ज्ञात रहे कि वर्ष 2019 के आम चुनाव में राफ़ेल की क़ीमत का मुद्दा कांग्रेस ने भरपूर तरीक़े से उठाया था। यहां तक कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि आखिर राफ़ेल फाइटर प्लेन आ गया। 126 राफ़ेल ख़रीदने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने 2012 में फ़ैसला लिया था और 18 राफ़ेल को छोड़कर बाकी भारत सरकार की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में निमार्ण का प्रावधान था। यह भारत के आत्मनिर्भर होने का प्रमाण था। एक राफेल की कीमत 746 करोड़ तय की गई थी।
कांग्रेस महासचिव एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ने आगे लिखा कि मोदी सरकार आने के बाद फ़्रांस के साथ मोदी जी ने बिना रक्षा व वित्त मंत्रालय व कैबिनेट कमेटी की मंज़ूरी के, नया समझौता कर लिया और हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का हक़ मार कर निजी कम्पनी को देने का समझौता कर लिया। राष्ट्रीय सुरक्षा की अनदेखी कर 126 राफ़ेल खरीदने के बजाय केवल 36 ख़रीदने का निर्णय ले लिया।