29 जुलाई 2020 - 12:37
जब फिल्मों में बहादुरी के झंडे गाड़ने वाले अमरीकी सैनिक, ईरान के डर से छुपे बंकरों में ... भारतीय पायलट भी थे उनके साथ ...

फार्स की खाड़ी में ईरान का " पयाम्बरे आज़म 14 " युद्धाभ्यास जारी है। इस युद्धाभ्यास के दौरान ईरान ने अमरीकी विमानवाहक पोत की एक प्रतिकृति पर मिसाइल दागे। लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुल यौम ने इसका जायज़ा लिया है।

अमरीका की सैन्य शक्ति का बड़ा नाम है, विशेषकर उसकी नौसेना का तो पूरी दुनिया में डंका बजता है, लेकिन ईरान ने अमरीका के एक विमानवाहक युद्धपोत का मॉडल तैयार करके उस पर हमला किया जो निश्चित रूप से अमरीका के लिए भड़काऊ कार्यवाही है और उसकी नौसेना को एक तरह से उकसाना है जिसे इस बात पर गर्व है कि दुनिया में उसकी बराबरी करने वाला कोई नहीं है।

    इस युद्धाभ्यास जो ईरान ने जो संदेश देना चाहा है वह कई हैं, सब से पहला तो यह है कि ईरान अमरीका को यह बताना चाहता है कि उसकी धमकियां, खोखली नहीं हैं और वह सच में भी फार्स की खाड़ी में अमरीकी युद्धपोत पर इस तरह का हमला कर सकता है।

    बहरैन में तैनात अमरीकी नौसेना के पांचवे बेड़े के प्रवक्ता ने ईरान द्वारा इस युद्धाभ्यास पर बयान में कहा है कि हमें यह नहीं मालूम कि इस प्रकार का मॉडल बना कर ईरान क्या हासिल करना चाहता है? या किसी भी हमले में इस प्रकार के मॉडल का महत्व क्या है?

   अमरीका के पांचवें बेड़े की प्रवक्ता रेबिका रेबारिट्स ने इस के साथ ही इस प्रकार के काल्पनिक हमले की शक्ति और प्रभाव को स्वीकार भी किया क्योंकि उन्होंने कहा कि हमारी नौसेना इस प्रकार के सभी हमलों का सामना करने की क्षमता रखती है। रोचक बात यह है कि अमरीका के इस पांचवे बेड़े का अभियान वास्तव में किसी भी देश पर क़ब्ज़े के लिए हमला करना और अमरीका विरोधी सरकारों को गिराना है इस लिए यह बहुत कम देखा गया है कि पांचवां बेड़ा, रक्षात्मक पोज़ीशन में नज़र आए जबकि ईरान उन सरकारों में शामिल है जिसे गिराना, अमरीका का मुख्य उद्देश्य है।

    इस युद्धाभ्यास की जो फुटेज मैक्सर टेक्नोलोजीज़ ने दिखायी है उसके अनुसार, ईरानी स्पीड बोट्स तेज़ी से अमरीकी युद्धपोत के मॉडल की ओर बढ़ रही हैं जिस पर 16 युद्धक विमानों के मॉडल नज़र आ रहे हैं, इसी के साथ एक अन्य अमरीकी युद्धपोत के मॉडल ने इस हमले को रोकने की कोशिश की।

    ईरान ने अमरीकी विमान वाहक युद्धपोत को जो मॉडल तैयार किया है वह अमरीका के नीमित्ज़ मॉडल से बहुत अधिक समानता रखता है और अमरीका इसे विमानवाहक युद्धपोत को अपने कई समुद्री अभियानों में प्रयोग कर चुका है। ध्यान योग्य बात यह है कि यह अमरीका का यह विमानवाहक  युद्धपोत मध्य पूर्व के जल में प्रवेश कर रहा है और इसी दौरान ईरानियों ने उस के मॉडल पर हमले का अभ्यास किया है।

यूएसएस निमित्ज श्रेणी का यह पोत पिछले सप्ताह ही हिंद महासागर से मध्य-पूर्व के समुद्री क्षेत्र में घुसा

 है।

 यह सब कुछ सेटेलाइटों की मदद से पूरी दुनिया ने देखा हालांकि ईरानी अधिकारियों ने खुल कर इस बारे में कोई बयान नहीं दिया है लेकिन ईरानी अधिकारियों को पता है कि यह सब कुछ देखा जा रहा है इसी लिए शायद उन्होंने अपने दुश्मनों और उनके क्षेत्रीय घटकों के सामने यह युद्धाभ्यास किया है।   

 ईरान ने फार्स की खाड़ी में युद्धभ्यास किया लेकिन इलाक़े में अमरीका की सभी छावनियों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था। एक अमरीकी अधिकारी ने यूरोप न्यूज़ को बताया है कि यूएई की " अज़्ज़फरा" और क़तर के " अलअदीदी" एयर बेस में अमरीकी सैनिकों को अलर्ट रहने का आदेश दिया गया था।

    यूरो न्यूज़ को एक अमरीकी अधिकारी ने बताया कि जब ईरान ने अमरीकी विमानवाहक युद्धपोत पर हमले के लिए मिसाइल फायर किये तो इन अमरीकी छावनियों में मौजूद अमरीकी सैनिक बंकरों में चले गये और 20 मिनट बाद जब उन्हें विश्वास हो गया कि ईरान के मिसाइल उनकी छावनियों  की तरफ नहीं आ रहे हैं तब वह बंकरों से बाहर निकल आए।

अमरीकी अधिकारी ने बताया कि  खतरे को देखते हुए बेस पर मौजूद लोगों ने स्वंय को सुरक्षित कर लिया और 20 मिनट के बाद जब अधिकारियों को लगा कि मिसाइलें उनके बेस की तरफ नहीं आ रही थीं तो फिर वहां सामान्य रूप से गतिविधियां शुरू हो गईं।

    फॉक्स न्यूज़ और सीएनएन ने भी कई ट्वीट करके इसी बात की जानकारी दी है।

     इसी मध्य पश्चिमी एशिया में अमरीकी सैन्य कमान सेन्टकॉम के प्रवक्ता ने भी इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा है कि यह दुर्घटना कई मिनटों तक जारी रही और अमरीकी सैनिकों को बंकरों में भेज दिया गया। अल दाफरा एयरबेस ही वह जगह है, जहां फ्रांस से भारत आ रहे पांच राफेल लड़ाकू विमान फिलहाल रुके हैं। 

 भारत के लिए पांच राफेल विमानों की पहली खेप सोमवार को फ्रांसीसी बंदरगाह शहर बोरदु में मेरिग्नैक एयरबेस से रवाना हुई थी। ये विमान लगभग 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद बुधवार दोपहर को अंबाला पहुंचेंगे लेकिन यह राफेल विमान सोमवार की शाम को लगभग सात घंटों की उड़ान के बाद संयुक्त अरब अमीरात की अलज़फरा छावनी  पहुंचे थे और जब इस छावनी में तैनात अमरीकी सैनिक, ईरानी युद्धाभ्यास में फायर किये गये मिसाइल से डर कर बंकरों में छुप रहे थे तो उस समय भारतीय पायलट भी वहां मौजूद थे।

    ईरान ने अपने समुद्री क्षेत्र बंदर अब्बास में एक घोषित युद्धाभ्यास के दौरान अमरीकी युद्धपोत के मॉडल पर मिसाइल फायर किये गये थे लेकिन उससे कई सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित यूएई और क़तर  की छावनियों में तैनात अमरीकी सैनिक बंकरों में जाकर छुप गये थे।

यह वही अमरीकी सैनिक हैं जिनकी बहादुरी के क़िस्से हॉलीवूड फिल्मों में इस तरह से बयान किये जाते हैं कि कभी कभी एक अमरीकी सैनिक ही दूसरे देश की सेना की एक टुकड़ी पर भारी दिखाया जाता है।

    इराक़ में भी अमरीकी सैनिक, हमलों के डर से डाइपर बांध पर गश्त पर निकलते थे। Q.A. इनपुट, रायुलयौम और इन्तेखाब वेबसाइट से