ईरान के पूर्व राजदूत मेहदी सफ़री का कहना था कि पिछले 6 वर्षों के दौरान चीन का तेल निर्यात दोगुना हो चुका है और उसे एक भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्तिकर्ता की ज़रूरत है, जो ईरान पूरी कर सकता है।
सफ़री के मुताबिक़, चीन पहले से ही अपनी ज़रूरत का आधा तेल प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 5.5 मिलियन बैरल तेल फ़ार्स खाड़ी के क्षेत्र से आयात कर रहा है।
उन्होंने कहाः चीन का कहना है कि वह अगले 25 वर्षों तक ईरान का तेल आयात करने की गारंटी दे सकता है।
सफ़री का कहना था कि चीन-ईरान रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी का एक मुख्य कारण, दक्षिण पूर्व एशिया में चीन पर अमरीका का दबाव है, जिससे बीजिंग कथित नए सिल्क रोड को पुनर्जीवित करने के लिए ईरान जैसे देशों की ओर देख रहा है।
ईरान के पूर्व राजदूत का कहना था, चीन के साथ व्यापक साझेदारी का समझौता, चीनी पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ-साथ कई क्षेत्रों में लाभदायक हो सकता है।
उन्होने कहाः हर साल 25 करोड़ चीनी पर्यटक दूसरे देशों की यात्रा करते हैं, अगर उनमें से केवल 10 लाख ईरान का रुख़ करते हैं तो इसका हमारी अर्थव्यस्था पर काफ़ी असर पड़ेगा।
हाल ही में ईरान-चीन रणनीतिक साझेदारी पर आलोचनाओं और अफ़वाहों का जवाब देते हुए ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने कहा था कि ईरान, चीन समेत किसी भी देश को अपनी एक इंच भी ज़मीन नहीं देगा।
ज़रीफ़ का कहना था कि इस समझौते के बारे में अभी बातचीत चल रही है।
समझौते के हिस्से के रूप में चीन को ईरान के कीश द्वीप या फ़ारस की खाड़ी के अन्य द्वीपों को लीज़ पर देने की अफ़वाहों को ख़ारिज करते हुए ज़रीफ़ ने कहाः इन अफ़वाहों में ज़रा सी भी सच्चाई नहीं है।