15 जुलाई 2020 - 19:03

इन्टरनेश्नल जस्टिस कोर्ट आईसीजे ने हवाई सीमाओं पर प्रतिबंध के मामले में सऊदी अरब, बहरैन, मिस्र और संयुक्त अरब इमारात के मुक़ाबले में क़तर के दृष्टिकोण की पुष्टि कर दी है।

ज्ञात रहे कि क़तर की एयर लाइन को 3 साल से अपने चारों पड़ोसी देशों की हवाई सीमा में जाने की अनुमति नहीं है।

अलजज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार आईसीजे के प्रमुख ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सिविल एवीएशन के फ़ैसले के विरुद्ध बहरैन, मिस्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात की अपील रद्द की जाती है।

अदालत ने यह मामला इन्टरनेश्नल सिविल एवीएशन आर्गनाइज़ेशन के दायरे में आता है।

ज्ञात रहे कि आईसीएओ ने 2018 में फ़ैसला दिया था कि हवाई स्वायत्ता के मामले पर क़तर और अन्य पक्षों के बीच झगड़ा ख़त्म करना, आईसीएओ के अधिकार के दायरे में आता है।

दूसरी ओर चारों अरब देशों ने आईसीएओ के फ़ैसले को रद्द कर दिया था और कहा था कि वह आईसीएओ से सहमत नहीं हैं और उक्त संस्था की ओर से फ़ैसला पूरी तरह ग़लत है जहां दोनों पक्षों को सही तरह से नहीं सुना गया।

 ज्ञात रहे कि क़तर ने आईसीएओ में अपना मुक़द्दमा पेश करते हुए कहा था कि उसके चारों पड़ोसी देश अंतर्राष्ट्रीय कन्वेनश्न का उल्लंघन कर रहे हैं जो विदेशी यात्री विमानों को हवाई सीमाओं से गुज़रने की पूर्ण छूट देता है।

क़तर ने आईसीजे के फ़ैसले का स्वागत किया और कहा कि जो देश हवाई सीमाओं की नाकाबंदी करते हैं उन्हें अंतर्राष्ट्रीय एवीएशन के नियमों के उल्लंघन पर न्याय का सामना करना पड़ेगा।

क़तर के परिवहन मंत्री का कहना था कि बहरैन, सऊदी अरब, मिस्र और संयुक्त अरब इमारात का तर्क धीरे धीरे रद्द हो रहा है और क़तर पर लगने वाले आरोप ख़त्म हो रहे हैं, आईसीजे का फ़ैसला, इन देशों के गुप्त इरादों को ज़ाहिर कर रहा है।