विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार को पत्रकार सम्मेलन में 14 जूलाई सन 2015 में जेसीपीओए समझौते पर हस्ताक्षर की वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए कहा अमरीका में डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने से पहले तक जेसीपीओए के कुछ विषय संतुलित प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे थे लेकिन ट्रम्प सरकार के सत्ता में आते ही, अमरीकी सरकार गैर ज़िम्मेदाराना रवैया अपना कर जेसीपीओए से निकल गयी और दो चरणों में ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया गया।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि एक ओर जेसीपीओए को असंतुलित रूप से लागू किये जाने और दूसरी ओर अमरीकी प्रतिबंधों तथा ईरान के साथ सहयोग न करने के लिए कंपनियों और बैंकों पर दबाव की वजह से ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने 8 मई 2019 में जेसीपीओए की प्रतिबद्धताओं में कमी का एलान किया और जेसीपीओए के पक्षों को 60 दिनों का समय दिया।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने परमाुण प्रतिबद्धताओं में कमी की दिशा में ईरान के कदम़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि पांचवे क़दम के आधार पर जो प्रतिबद्धताओं में कमी का अंतिम क़दम भी था, सेन्ट्रीफ्यूज की संख्या के बारे में समझौते में किये गये वचन का पालन खत्म कर दिया गया और उसके बाद से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को आप्रेशनल सीमा की समस्या नहीं है और ईरान का परमाणु कार्यक्रम तकनीकी ज़रूरत के हिसाब से आगे बढ़ा है।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सेफगार्ड और पूरक प्रोटोकोल के आधार पर आईएईए के साथ ईरान का सहयोग जारी है।
उन्होंने कहा कि ट्रम्प विदेश नीतियों के सहारे अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव में विजय का प्रयास कर रहे हैं और इसके साथ ही अमरीकी सरकार सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव क्रमांक 2231 की राह में बाधा डालने की कोशिश कर रही है लेकिन इस प्रस्ताव के आधार पर 18 अक्तूबर सन 2020 में ईरान पर हथियारों का प्रतिबंध खत्म हो जाएगा।