व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने रूस और चीन से बहुत ही असहाय और बेबस होकर यह अपील की है।
ग़ौरतलब है कि ईरान और विश्व की 6 बड़ी शक्तियों के बीच 2015 में परमाणु समझौता हुआ था, जिसके तहत पांच साल बाद, यानी अक्तूबर 2020 में ईरान से संयुक्त राष्ट्र संघ के हथियारों के प्रतिबंध हट जायेंगे।
अमरीका मई 2018 में इस समझौते से बाहर निकल गया था और उसने फिर से तेहरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। अब अमरीका की कोशिश यह है कि किसी भी तरह ईरान पर लागू हथियारों के प्रतबिंधों के समय में वृद्धि हो जाए।
अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने दावा किया है कि अगर ईरान पर लगे हथियारों के प्रतिबंध हट जायेंगे तो तेहरान ख़रीदे गए हथियारों का शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए प्रयोग नहीं करेगा।
वाशिंगटन का कहना है कि अगर उसके प्रयासों का कोई नतीजा नहीं निकलेगा तो वह परमाणु समझौते में मौजूद विवाद के समाधान के तंत्र का प्रयोग करेगा, ताकि ईरान पर संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी प्रतिबंध फिर से लागू हो जायें।
हालांकि ईरान और समझौते में शामिल बाक़ी देशों का कहना है कि इस समझौते से निकलने के बाद, वाशिंगटन को इस तरह का कोई अधिकार हासिल नहीं है।
अमरीका ने ईरान पर लगे हथियारों के प्रतिबंध को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों को प्रस्ताव की कॉपियां बांटी हैं।
वहीं रूस और चीन पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि वह इस तरह के किसी भी प्रस्ताव को ग़ैर क़ानूनी समझते हैं और बिना झिझक उसे वीटो कर देंगे।
इस बीच, ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों की अवधि को आगे बढाया गया तो न केवल परमाणु समझौता ख़तरे में पड़ जाएगा, बल्कि एनपीटी में बने रहने पर भी पुनर्विचार करेगा।