2 जुलाई 2020 - 14:46
पश्चिमी तट पर क़ब्ज़े की इस्राईली योजना कामयाब क्यों नहीं हुई? इस्राईली अख़बार की समीक्षा

इस्राईल से प्रकाशित होने वाले एक अख़ार हारेत्ज़ ने अपने एक लेख में इस बात की समीक्षा की है कि पश्चिमी तट के तीस प्रतिशत हिस्से को इस्राईल में शामिल करने की नेतनयाहू की योजना क्यों कामयाब नहीं हुई?

हारेत्ज़ में आनशील फ़ीफ़र का एक लेख प्रकाशित हुआ है जिसमें उन्होंने लिखा है कि पहली जुलाई को पश्चिमी तट के एक बड़े भाग को इस्राईल में जोड़ने की योजना की नाकाम की एक बड़ी वजह यह है कि आरंभ से ही यह योजना असंभव लग रही थी लेकिन नेतनयाहू ने अपने भ्रष्टाचार के मामलों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए इस एक हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल करना चाहा था, यह व्यवहारिक योजना थी ही नहीं।

 

लेख में एक प्राचीन यहूदी दास्तान बयान करने के बाद कहा गया है कि जब नेतनयाहू ने इस्राईल के चैनल नंबर 12 को इंटरव्यू देते हुए पश्चिमी तट के 30 फ़ीसदी हिस्से को इस्राईल में शामिल करने की योजना पेश की थी तो वह संसदीय चुनाव से पहले नेतनयाहू के चुनावी प्रचार का आरंभिक समय था और तभी से उन्होंने जनमत का ध्यान भटकाने के लिए इस योजना का प्रचार शुरू कर दिया था। हारेत्ज़ ने लिखा है कि अब तक तो नेतनयाहू इस योजना को अपने भ्रष्टाचार की ओर से लोगो़ं का ध्यान हटाने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे और अब कोरोना वायरस से निपटने में अपनी सरकार की नाकामी को छिपाने के लिए प्रयोग करना चाहते हैं क्योंकि उन्होंने कोरोना वायरस से निपटने के लिए सही रणनीति नहीं बनाई जिसके कारण इस्राईल में कोरोना वायरस की दूसरी लहर आ गई है। इसी तरह आर्थिक संकट से निकलने के लिए भी उन्होंने कोई पारदर्शी रास्ता पेश नहीं किया है।

 

इस समाचारपत्र ने नेतनयाहू की इस योजना के अंतर्राष्ट्रीय प्रभावों के बारे में लिखा है कि पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों को इस्राईल से जोड़ने की योजना से विश्व मंच पर भी नेतनयाहू को कुछ न कुछ हासिल हो गया है। अब तक विश्व समुदाय इस्राईल पर दबाव डालता था कि वह पश्चिमी तट में अवैध क़ब्ज़े की कार्यवाही बंद करे, फ़िलिस्तीनियों की ज़मीनों से पीछे हटे, यहूदी बस्तियों को बंद करे और एक स्वाधीन फ़िलिस्तीनी सरकार का गठन होने दे लेकिन जब से नेतनयाहू ने अपनी योजना पेश की है तब से दुनिया कह रही है कि बस यह योजना छोड़ दो, हम अवैध क़ब्ज़े के बारे में कुछ नहीं कहेंगे।

 

पत्र ने लिखा है कि निश्चित रूप से नेतनयाहू ने पश्चिमी तट को इस्राईल से जोड़ने की योजना नहीं बनाई है, कोई कार्यक्रम नहीं है, कोई समय सीमा नहीं है, दस्तावेज़ का कोई मसौदा नहीं है जिसे मंत्रीमंडल या संसद में पेश किया जा सके। यह सारी बातें इस शक को ही मज़बूत बनाती हैं कि 17 महीने पहले जब नेतनयाहू ने यह योजना पेश की थी तो यह दक्षिणपंथियों के ज़्यादा से ज़्यादा वोट हासिल करने के एक चुनावी वादे से ज़्यादा कुछ नहीं थी।