अमरीका में डेमोक्रेट्स जैसे ट्रम्प के राजनीतिक विरोधी ईरान के इस क़दम से कैसे लाभ उठा सकते हैं?
अमरीका में गुटबाज़ी की सियासत अपने चरम पर है। इसलिए इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि ट्रम्प ने अगर अपने विरोधियों के राज्य क्षेत्राधिकार में क़दम रखा तो वे उनकी गिरफ़्तारी पर विचार कर सकते हैं।
कई मोर्चों पर बुरी तरह नाकामी के बाद, ट्रम्प अपनी राजनीचिक ज़मीन वैसे भी खोते जा रहे हैं और ताज़ा सर्वेक्षणों के मुताबिक़ लोकप्रियता में वह अपने डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वी बाइडन से काफ़ी पिछड़ चुके हैं।
ट्रम्प के विरोधियों के नज़र में पहले से ही उनकी प्रतिष्ठा काफ़ी ख़राब हो चुकी है? उनके ख़िलाफ़ लगाए गए अपराधों और दुष्कर्मों के मुक़दमे में अगर वह दोषी ठहराए जाते हैं तो वे इंटरपोल के रेड नोटिस का लाभ क्यों नहीं उठाना चाहेंगे?
इन अटकलों से हटकर इस बात में कोई शक नहीं है कि जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या के लिए ईरान द्वारा जारी किए गए गिरफ़्तारी के वारंट से साबित होता है कि अमरीकी राष्ट्रपति के पद का रुतबा किस हद तक गिर गया है।
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने खुलकर जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश देने की बात स्वीकार की थी।
एक समय था जब अमरीकी राष्ट्रध्यक्ष, अपने विदेशी दुश्मनों के ख़िलाफ़ की गई कार्यवाहियों में अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करते थे। लेकिन ट्रम्प के साथ ऐसा नहीं है। वह शर्मनाक हद तक ग़ैर क़ानूनी हत्याएं कराने का एलान करते हैं। वास्तव में वह वाशिंगटन की ख़ून में डूबी हुई सियासत को उजागर करते हैं।
बहरहाल ईरानी वारंट चाहे एक प्रतिकात्मक क़दम ही क्यों न हो, ट्रम्प प्रशासन ने इसे प्रोपैगंडा स्टंट क़रार दिया है।
फ़्रांस स्थित इंटरपोल का कहना है कि अगर उसे ट्रम्प को गिरफ़्तारी का वारंट मिलेगा तो उसका अपना क़ानून इस पर अमल करने की अनुमति नहीं देगा।