शहीदों के शवों के आगमन में कम लोग शामिल हुए जिसकी वजह कोरोना वायरस का फैलाव है। इसी वजह से शवों का स्वागत कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ।
ये 192 शहीद, बलफ़ज्र प्राथमिक, वलफ़्रज्र-1, रमज़ान, ख़ैबर, बद्र, कर्बला-4, कर्बला-5 और बैतुल मुक़द्दस-7 नामक ऑप्रेशन में शामिल हुए थे।
इराक़ के पूर्व सद्दाम शासन द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ थोपी गयी जंग में, 2 लाख 30 हज़ार शहीद, इससे ज़्यादा घायर और हज़ारों लापता हो गए।
इस जंग में कुछ अरब और पश्चिमी देशों ने इराक़ का साथ दिया था, जिसका लक्ष्य ईरान की इस्लामी क्रांति को नाकाम बनाना था।