विदेशमंत्री ने अपने एक ट्वीटर संदेश में लिखा है कि अमरीका, ईरान के साथ तनाव बढ़ाने का प्रयास और अकारण ही दूसरों को अपना अनुसरण करने पर मजबूर करता रहा है।
जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि जो इराक़ में जनसंहार, यमन और फ़िलिस्तीन में युद्ध अपराध में लिप्त होने, समुद्री डकैती, परमाणु समझौते के उल्लंघन और प्रस्ताव क्रमांक 2231 के उल्लंघन की बात स्वीकार कर चुका है, ईरान को बदनाम करने के लिए आईएईए के फ़ैसलों और संयुक्त राष्ट्र संघ से नाजाएज़ फ़ायदा उठहाने का कोई हक़ नहीं रखता।
विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में ईरान विरोधी कार्यवाहियों और प्रतिबंधों को जारी रखने के अमरीकी प्रयासों की ओर इशारा किया और कहा कि अमरीका, ईरान के साथ तनाव बढ़ाने का प्रयास और ज़ोरज़बरदस्ती द्वारा दूसरों को अपना अनुसरण करने पर मजबूर करता रहा है।
ईरान के विदेशमंत्री ने इससे पहले अपने ट्वीट में अमरीकी सरकार में ज़ायोनी लॉबी आइपेक के प्रभाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि आइपेक नामक अमरीका-इस्राईल संबंधों की कमेटी ने निरंतर कई वर्षों से अमरीकी नीतियों को ज़हरीला बना दिया है और वह खुलेआम इस देश की कांग्रे के लिए आदेश जारी करती है।
विदेशमंत्री ने कहा कि आइपेक वर्षों से अमरीकी नीतियों को ज़हरीला बना रही है और कांग्रेस को आदेश देती है किन्तु अब समय आ चुका है कि पश्चिमी शक्तियों की वार्ताओं पर इस्राईली अपारथाइड के अत्याचार का क्रम बंद किया जाए।
ज्यूश टेलीग्राफ़ एजेन्सी पत्रिका ने अपनी एक रिपोर्ट में घोषणा की है कि अमरीका में ज़ायोनी लॉबी आइपेक ने वेस्ट बैंक के कुछ क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा करने की योजना पर कांग्रेस के सदस्यों को आलोचना की अनुमति दी है किन्तु उनसे यह भी कहा है कि आलोचनाओं से आगे न बढ़ें और इस योजना में रुकावट न बनें।
ज्ञात रहे कि अमरीका-इस्राईल संबंध कमेटी आइपेक, अमरीका में इस्राईल की समर्थक सबसे बड़ी और मज़बूत लॉबी समझी जाती है।