7 जून 2020 - 13:16
ट्रम्प, ईरान को बात-चीत का झांसा नहीं दे सकते, परमाणु समझौते में लौटें और सभी प्रतिबंध ख़त्म करेंः रायुल यौम

लंदन से प्रकाशित होने वाले अरबी समाचारपत्र रायुल यौम ने अपने एक संपादकीय लेख में अमरीकी राष्ट्रपति की ओर से ईरान को वार्ता का निमंत्रण दिए जाने की तरफ़ इशारा करते हुए कहा है कि अगर ट्रम्प चाहते हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में उनकी जीत की राह में तेहरान रुकावट न बने तो उन्हें वार्ता की बात करने के बजाए परमाणु समझौते में वापस आना और सभी प्रतिबंधों को समाप्त कर देना चाहिए।

सालेह क़ज़वीनी ने "ईरान से वार्ता में ट्रम्प कितने गंभीर हैं?" शीर्षक के अंतर्गत अपने एक लेख में लिखा है कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने तेहरान को वार्ता का निमंत्रण दिया है और कहा है कि अमरीकी नौसेना के पूर्व अधिकारी माइकल वाइट की रिहाई से पता चलता है कि ईरान व अमरीका के बीच सहमति की संभावना मौजूद है।  यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने ईरान को वार्ता का निमंत्रण दिया है बल्कि परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के बाद से ही वे निरंतर ईरान को वार्ता का निमंत्रण दे रहे हैं बल्कि उससे पहले भी उन्होंने बात-चीत का न्योता दिया था।

 

ट्रम्प ने हमेशा कहा है कि उनके साथ वार्ता के अच्छे परिणाम सामने आएंगे और उन्होंने हमेशा ही ईरानी वार्ताकारों की सराहना की है, यहां तक कि उन्होंने कहा है कि ईरान ने वार्ता के माध्यम से जो कुछ चाहा है, हासिल कर लिया है जबकि सभी लड़ाइयों में वह पराजित हुआ है। इसके मुक़ाबले में तेहरान ने कभी भी ट्रम्प के निमंत्रण को अहमियत नहीं दी है और हमेशा यह कहा है कि अगर अमरीका को कुछ भी कहना है तो उसे पहले परमाणु समझौते में लौटना और सभी प्रतिबंधों को ख़त्म करना होगा।

 

तेहरान ने कई बार कहा है कि उसे वार्ता से कोई डर नहीं है और उसने बिलकुल सही कहा है क्योंकि अगर उसे डर होता तो वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के साथ वार्ता की मेज़ पर नहीं बैठता और परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता लेकिन चूंकि ईरान पहले ही से जानता है कि ट्रम्प वार्ता का निमंत्रण दे कर क्या चीज़ हासिल करना चाहते हैं इस लिए वह उनकी इच्छाओं की पूर्ति का माध्यम नहीं बनना चाहता। ईरान अच्छी तरह जानता है कि अगर बहुत अधिक सकारात्मक सोच से भी काम लिया जाए तो ट्रम्प वार्ता को लम्बा खींच देंगे, यहां तक कि ईरान को कुछ भी दिए बिना उनका राष्ट्रपति काल ख़त्म हो जाए, या दूसरे शब्दों में किसी व्यवहारिक नतीजे के बिना ही बात-चीत समाप्त हो जाए। ईरानी इसी तरह यह बात भी अच्छी तरह जानते हैं कि ट्रम्प की पूरी कोशिश यही है कि अमरीका, ईरान के ख़िलाफ़ तरह तरह के प्रतिबंध लगाता रहे और ईरान उसके ख़िलाफ़ कुछ भी न करे और केवल मूक दर्शक बना रहे।

 

अंत में यही कहना चाहिए कि अगर अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प यह चाहते हैं कि तेहरान, अपनी ओर से कुछ न करे और उनके पुनः राष्ट्रपति बनने के मार्ग में रोड़े न अटकाए तो उन्हें वार्ता के केवल ज़बानी निमंत्रण को बंद करना चाहिए और ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते में लौटते हुए उसके ख़िलाफ़ लगाए गए सभी प्रतिबंधों को समाप्त कर देना चाहिए। ये सब करने के बाद संभव है कि ईरान, अमरीका के साथ वार्ता की बात को मान ले वरना ईरान, अपनी कार्यवाहियां जारी रखेगा और फिर उसे केवल एक ही चीज़ रोक पाएगी और वह है ट्रम्प का अपने रुख़ से पीछे हटना।