3 जून 2020 - 16:45
अपने व्यवहार के कारण पूरी दुनिया में अपमानित हुआ है अमरीकाः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि अमरीका में घटने वाली वर्तमान घटनाओं ने इस देश की उन वास्तविकताओं को उजागर कर दिया जिन्हें अबतक छिपाया जा रहा था।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने बुधवार 3 मई को स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी की बरसी के अवसर पर टेलिविज़न से प्रसारित होने वाले अपने संबोधन में अमरीका में हालिया दिनों में घटने वाली घटनाओं का उल्लेख किया।  उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने उन वास्तविकताओं को उजागर कर दिया जिन्हें अबतक छिपाया गया था।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि एक श्वेत पुलिस अधिकारी द्वारा एक अश्वेत व्यक्ति की गर्दन पर घुटना रखकर इतनी देर तक दबाए रखना कि वह बेसुध होकर मर जाए, अमरीका में कोई नई चीज़ नहीं है।  उन्होंने कहा कि यही अमरीकी सरकारों का व्यवहार है जिसे अफ़ग़ानिस्तान, इराक़ और सीरिया में स्पष्ट रूप में देखा गया और इससे पहले यही काम वियतनाम में भी किया गया।  वरिष्ठ नेता के अनुसार अमरीकी विरोध प्रदर्शनों में दोहराया जाने वाला यह स्लोगन कि "मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं" वास्तव में अत्याचारग्रस्त राष्ट्रों के दिल की आवाज़ है।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई कहते हैं कि एक ओर तो कोरोना महामारी से निबटने में अमरीकी प्रशासन की विफलता, जिसमें अन्य देशों की तुलना में अमरीका में बहुत अधिक लोग मारे गए और दूसरी ओर एक निहत्थे अश्वेत अमरीकी की पुलिस के हाथों निर्मम हत्या जैसी बातों के बावजूद वहां पर मानवाधिकारों के एसे दावे किये जा रहे हैं मानो, पुलिस के हाथों मारा जाने वाला अमरीकी अश्वेत, इन्सान ही नहीं था और न ही उसके कुछ अधिकार थे।  उन्होंने अमरीकी सरकारों विशेषकर वर्तमान सरकार के कारनामों के कारण अमरीकी जनता में पाई जाने वाली शर्मिन्दगी की ओर संकेत करते हुए कहा कि अब वे लोग सिर उठाकर नहीं चल पाएंगे जिनका काम खुलकर अमरीका का समर्थन करना था।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने अपने संबोधन के दूसरे भाग में कहा कि स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी की सबसे बड़ी विशेषता परिवर्तन की इच्छा था।  उन्होंने कहा कि जब स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने इस्लामी आन्दोलन का आरंभ किया था तो उस समय राष्ट्र के मन में भविष्य को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं था किंतु उन्होंने इस्लामी क्रांति के माध्यम से राष्ट्र के लिए उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया।  वरिष्ठ नेता ने कहा कि स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी की एक अन्य विशेषता यह थी कि वे महाशक्तियों के सामने डटे रहे।  उनका कहना था कि उस समय जब कोई यह सोच भी नहीं सकता था कि कोई अमरीका को ललकार सकता है उस समय इमाम ख़ुमैनी ने उनको ललकारते हुए यह सिद्ध कर दिया कि विश्व के वर्चस्ववादियों को चोट पहुंचाई जा सकती है।  आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि इस वास्तविकता को पूर्व सोवियत संघ के विघटन और अमरीका की वर्तमान स्थिति में स्पष्ट रूप में देखा जा सकता है।