कुवैत में आबादी के अनुपात के मुद्दे पर चर्चा चल रही है जिसके दौरान कुवैती सांसदों ने यह प्रस्ताव रखा है कि देश में भारतीय मूल के लोगों की संख्या कुवैत की आबादी के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए जबकि मिस्री मूल के लोगों की संख्या भी कम की जानी चाहिए।
प्रस्ताव में कहा गया है कि कुछ देशों से आने वाले प्रवासियों की संख्या कुवैत की आबादी के बराबर होती जा रही है जो सुरक्षा की दृष्टि से चिंताजनक है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि देश के भीतर रोज़गार के लिए आने वाले विदेशियों का कोटा तय कर दिया जाए और कोटा पूरा हो जाने की स्थिति में उस देश से किसी नए कामगार के लिए वीज़ा जारी न किया जाए।
सांसदों का कहना है कि यह समस्या पहले भी चिंता का विषय बनी लेकिन कोरोना महामारी के दौरान इस मुद्दे की गंभीरता को अधिक शिद्दत से महसूस किया गया।