इराक़ के स्वंय सेवी बल ने पूर्वी इराक़ के दियाला प्रान्त में दाइश के आतंकवादों का एक बड़े खुफिया ठिकाने का पता लगा कर उस पर क़ब्ज़ा कर लिया है।
" अलहश्दुश्शाबी " के संपर्क व सूचना अधिकारी सादिक अलहुसैनी ने शुक्रवार को बताया है कि स्वंय सेवी बल ने दियाला प्रान्त में दाइश के सब से बड़े खुफिया ठिकाने पर क़ब्ज़ा कर लिया है।
उन्होंने बताया कि स्वंय सेवी बल ने सैनिकों और युद्धक विमानों की मदद से अभियान चलाया जिसके दौरान हिमरैन झील के निकट दाइश से एक बड़े खुफिया अड्डे पर क़ब्ज़ा कर लिया।
उन्होंने बताया कि पंद्रह वर्षों से आतंकवादियों का यह खुफिया ठिकाना सुरक्षा बलों की पहुंच से दूर था।
आतंकवादी संगठन दाइश के इस खुफिया ठिकाने में बम और बारुदी सुरंगे बनायी जाती थीं।
अस्ल में अमरीका और सऊदी अरब इराक़ और सीरिया में दाइश द्वारा फिर से अशांति फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
इराक़ी संसद में इस देश से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालने का बिल पास हो चुका है इसी लिए अमरीका की कोशिश कि इराक़ में अशांति पैदा करके अपने रुकने का बहाना पैदा करे।
सऊदी अरब भी अपने और अपने मित्रों के उद्देश्यों की वजह से इस साज़िश में पूरा सहयोग कर रहा है।
पिछले हफ्ते इराक़ी विश्लेषक सअदु अलकाबी ने अपने एक बयान में कहा है कि अमरीका बगदाद पर क़ब्ज़े की तैयारी कर चुका है और इस साज़िश में कुछ इराक़ी भी उसका साथ दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अमरीका इराक़ में अपने सब से बड़े साधन अर्थात आतंकवादी संगठन दाइश से हाथ धो बैठा है इस लिए अब वह दाइश को दोबारा आज़माने के साथ ही साथ इराक़ में राजनीतिक प्रक्रिया द्वारा बगदाद पर अपनी पकड़ बनाना चाह रहा है।
अलकाबी ने बताया कि अमरीका ने अक्तूबर 2019 के जन प्रदर्शनों में भी हस्तक्षेप किया था और पूरे इराक में अशांति व हंगामा फैलाने की साज़िश रची थी ताकि इस तरह से इराक़ को कई हिस्सों में बांट दिया जाए इसके लिए अमरीका ने देश के पश्चिमी और उत्तरी प्रान्तों की कुछ प्रभावशाली हस्तियों के सहयोग पर काफी भरोसा किया था।
दो दिन पहले इराकी सांसद ने भी कहा था कि सऊदी अरब ने दाइश के आतंकवादियों को इराक़ भेजने का सिलसिला रोका नहीं हैं और आज भी वह इराक़ में सक्रिय आतंकवादियों की मदद कर रहा है।