17 मई 2020 - 18:38
वेनेज़ुएला जा रहे ईरानी तेल टैंकर को रोकने से पहले अमरीका, ब्रिटेन से पूछ ले कि उसका क्या हश्र हुआ था

ईरान की इस्लामी क्रांति फ़ोर्स आईआरजीसी के निकट मानी जाने वाली न्यूज़ एजेंसी का कहना है कि अमरीका ने वेनेज़ुएला के लिए ईंधन ले जा रहे जहाज़ के ख़िलाफ़ समुद्री डाकुओं की तरह व्यवहार किया तो इसका नतीजा बहुत ख़तरनाक होगा।

गुरुवार को अमरीका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने धमकी दी थी कि वाशिंगटन ईरानी तेल टैंकर के ख़िलाफ़ कार्यवाही कर सकता है।

अमरीकी अधिकारी का कहना है कि वाशिंगटन को इस बात का पूरा यक़ीन है कि वेनेज़ुएला, ईरान को तेल की क़ीमत का भुगतान सोने में कर रहा है।

अमरीका ने वेनेज़ुएला और ईरान दोनों ही देशों पर प्रतिबंध लगा रखे हैं।

ईरान की नूर न्यूज़ एजेंसी का कहना है कि अगर अमरीका ने अंतरराष्ट्रीय पानियों में समुद्री डाकुओं की तरह व्यवहार किया तो उसे भारी जोखिम उठाना पड़ सकता है और निश्चित रूप से इसका जवाब ज़रूर दिया जाएगा।

ईरान का एक बड़ा तेल टैंकर वेनेज़ुएला की ईकोन रिफ़ाइनरी के लिए तेल लेकर जा रहा है। वेनेज़ुएला आजकल भारी ईंधन की कमी से जूझ रहा है।

तेहरान का कहना है कि ईरान और वेनेज़ुएला के बीच व्यापार जारी है और आगे भी जारी रहेगा, किसी तीसरे पक्ष को दोनों देशों के आपसी मामलों में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है।

ईरान के एक विश्लेषक मेहदी मोहम्मदी का कहना है कि अगर अमरीका ने कोई ग़लती की तो तेहरान फ़ार्स खाड़ी में अमरीकी जहाज़ों के ख़िलाफ़ जवाबी कार्यवाही कर सकता है।

उन्होंने कहाः कोई भी फ़ैसला करने से पहले ट्रम्प को चाहिए कि वह अपने दोस्त ब्रिटिश प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन से ब्रितानी तेल टैंकरों को हुए अनुभवों के बारे में पूछ लें।

पिछले साल जिब्राल्टर में ब्रिटेन द्वारा एक ईरानी तेल टैंकर को रोके जाने के बाद, ईरान ने फ़ार्स खाड़ी में एक ब्रिटिश तेल टैंकर को ज़ब्त कर लिया था। उसके बाद ब्रिटेन, ईरानी तेल टैंकर को आज़ाद करने के लिए मजबूर हो गया था।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी तेल टैंकर क्लेवल ने मार्च के अंत में बंदर-अब्बास बंदरगाह में ईंधन लोड किया था। बुधवार को यह जहाज़ स्वेज़ नहर से गुज़र गया।

सूत्रों का कहना है कि अमरीकी नौसेना ने ईरानी जहाज़ों को रोकने के लिए चार युद्धपोत कैरिबियन क्षेत्र की ओर रवाना किए हैं।

वेनेज़ुएला ख़ुद विश्व में सबसे ज़्यादा तेल उत्पादन करने वाले देशों में से एक है और यह ओपेक का सदस्य भी है। लेकिन अमरीकी प्रतिबंधों और कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के कारण, उसकी अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है।