इन वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि मॉनसून के दौरान संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़ सकती है।
पीटीआई के अनुसार शिव नादर विश्वविद्यालय के गणित विभाग के सह प्राध्यापक समित भट्टाचार्य ने कहा कि कोरोना महामारी का दूसरा दौर जुलाई अंत या अगस्त में मॉनसून में देखने को मिल सकता है। उनका यह भी कहना था कि हालांकि शीर्ष पर पहुंचने का समय इस बात पर निर्भर करेगा कि हम उस समय सामाजिक दूरी को किस तरह नियंत्रित करते हैं। बेंगलुरु के भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के प्राध्यापक राजेश सुंदरेसन भी समित भट्टाचार्य की बात से सहमत हैं।
सुंदरेसन ने पीटीआई से कहा कि जब हम सामान्य गतिविधि के दौर में लौटेंगे, उस वक्त ऐसी आंशका रहेगी कि संक्रमण के मामले एक बार फिर बढ़ने लगें। भट्टाचार्य कहते हैं कि जबतक बाजार में कोरोना का वैक्सीन आता है उस समय तक हमें चौकस रहना होगा। वे कहते हैं कि ध्यान रखिए कि मानसून के महीने हमारे देश में अधिकतर स्थानों पर फ्लू के मौसम के भी महीने होते हैं इसलिए हमें फ्लू के शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना है। बेंगलुरु और मुंबई को प्रतिरूप मानकर किए गए अध्ययन के मुताबिक कोरोना संक्रमण का दूसरा दौर भारत में देखने को मिलेगा और जन स्वास्थ्य का खतरा इसी प्रकार उस समय तक बना रहेगा जबतक कि मामलों का आक्रामक तरीके से पता लगाने, स्थानीय स्तर पर उन्हें रोकने और पृथक करने के लिए कदम न उठाए जाएं और साथ ही नए संक्रमण को आने से रोका जाए।
ज्ञात रहे कि भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वहां पर कोविड-19 मरीजों की संख्या शनिवार सुबह बढ़कर 24 हजार के पार पहुंच गई। कोरोना के कारण भारत में 775 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत में कोरोना वायरस मरीजों की संख्या 24,506 हो गई है जिसमें अबतक 5063 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं। भारत में बीते 12 घंटों में 52 मौतें हुई हैं जबकि कोरोना संक्रमण के 1054 नए मामले सामने आए हैं।