16 अप्रैल 2020 - 17:41
डब्ल्यूएचओ की फ़ंडिंग रोकने पर क्यों ज़रूरी है कि ट्रम्प को युद्ध अपराधी माना जाए? हम क्यों कर रहे हैं अलबरादेई के प्रस्ताव का स

यह बात तो बिल्कुल सामने की है कि कोरोना महामारी से पैदा होने वाले संकट से निपटने के लिए चीन ने जो तरीक़ा अपनाया उससे अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प नफ़रत करते हैं लेकिन वह अपने आक्रोश और नफ़रत में डब्ल्यूएचओ को दी जानी वाली सहायता रोक दें जिसने विश्व स्तर पर मानवता की सराहनीय सेवा की है तो इससे ट्रम्प की नस्लपरस्ती, तुच्छता और अमरीकी व्यवस्था से हटकर हासिल होने वाली हर सफलता से उनकी जलन ज़ाहिर होती है।

डब्ल्यूएचओ को दी जाने वाली 40 करोड़ डालर की सारी फ़ंडिंग रोकने का ट्रम्प का फ़ैसला वह भी इस समय जब दुनिया के सारे देश अपने मतभेदों को किनारे रखते हुए कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एकजुट होना चाहते हैं यह ज़ाहिर करता है कि यह व्यक्ति अपने ओहदे की वजह से पूरी मानवता के लिए ख़तरा बन चुका है। इन हालात में ख़ुद अमरीकी जनता सहित सबकी यह ज़िम्मेदारी बनती है कि ट्रम्प को कोरोना से भी ज़्यादा ख़तरनाक और घातक महामारी में बदल जाने से पहले बर्ख़ास्त कर दें।

ट्रम्प को दो ही चीज़ें अच्छी लगती हैं। एक तो ग़ैर क़ानूनी क़ब्ज़े की बुनियाद पर स्थापित इस्राईल है और दूसरी चीज़ अरब देशों का माल है। इसके अलावा उन्हें हर चीज़ से नफ़रत ही है। ट्रम्प ने युनेस्को के ख़िलाफ़ मोर्चा इसलिए खोल दिया कि उसने इस्राईल की नस्लपरस्ती की आलोचना की थी। ट्रम्प ने फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए दो रोटी का बंदोबस्ती करने वाली संस्था अनरवा की सहायता रोक दी क्योंकि वह फ़िलिस्तीनियों को मिटा देना चाहते हैं और अब उन्होंने डब्ल्यूएचओ की सहायता रोक दी क्योंकि उसके प्रमुख ओबामा की तरह अफ़्रीक़ी मूल के हैं और उन्होंने कोरोना के बारे में ट्रम्प के झूठे बयानों, झूठी ख़बरों और चीन के ख़िलाफ़ उनके बेबुनियाद आरोपों की पुष्टि नहीं की।

कोरोना महामारी के ख़तरे के बारे में झूठी ख़बरें फैलाने वाले पहले इंसान ख़ुद ट्रम्प हैं। अगर उनका बस चलता तो वह अमरीका में एक दिन के लिए भी लाक डाउन न करते क्योंकि अमरीकियों की ज़िदगियों से ज़्यादा उन्हें बिज़नेस से प्यार है। इसी लिए न्यूयार्क के गवर्नर एंड्र्यू कूमो ने एक अपूर्व क़दम उठाते हुए कहा दिया कि लाक डाउन हटाने का फ़ैसला राज्यों के गवर्नर ख़ुद करेंगे।

आईएईए के पूर्व महानिदेशक मुहम्मद अलबरादेई के बहुत से विचारों से हमारी गहरी असहमति है विशेष रूप से उन्होंने इराक़ युद्ध के बारे में जो नज़रिया अपनाया था उसके तो हम पक्के विरोधी हैं लेकिन इस समय उन्होंने जो सुझाव दिया है कि अरब देश अपनी इंसानी छवि पेश करने और यह ठोस संदेश देने के लिए कि दुनिया अमरीकी सरकार की नीतियों की बंधक नहीं है, आगे बढ़ें और डब्ल्यूएचओ को अमरीका की तरफ़ से रोकी जाने वाली रक़म के बंदोबस्त की ज़िम्मेदारी संभाल लें, तो हम इससे पूरी तरह सहमत हैं। अलबत्ता यह कोशिश केवल अरब देशों ही नहीं बल्कि जर्मनी, फ़्रांस बेल्जियम जैसे यूरोपीय देशों और इसके साथ ही कैनेडा और दक्षिणी अफ़्रीक़ा जैसे ग़ैर यूरोपीय देशों की तरफ़ से भी होनी चाहिए ताकि अमरीका की तरफ़ से की गई इस जुनूनी कार्यवाही की प्रतिक्रिया ज़्यादा व्यापक स्तर की हो।

ट्रम्प जो बहुत बड़ी सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं कोरोना महामारी के आंकलन में कई बार नाकाम हुए और उन्होंने साबित कर दिया कि वैज्ञानिक और चिकित्सा दृष्टि से उनकी सरकार महामारी का मुक़ाबला करने में असमर्थ हैं। उन्होंने अपने रवैए से यह भी साबित किया है कि नैतिक रूप से वह बहुत गिर गए हैं और मानवता को मिटाने और अपराधों के नोबल पुरस्कार के वह सबसे बड़ हक़दार हैं

अमीर अरब देशों के लिए 40 करोड़ डालर की रक़म कोई मायने नहीं रखती जो ट्रम्प का समर्थन हासिल करने की ख़ातिर अरबों डालर ख़र्च कर रहे हैं मगर क्या इन देशों के पास इतनी हिम्मत है कि अमरीका के बदले वह इस ख़र्च को संभाल लें? हमें तो इसमें संदेह है क्योंकि हमारे सामने युनेस्को और अनरवा के अनुभव मौजूद हैं।

अमरीकी जनता के पास यह अच्छा मौक़ा है कि इस दरिंदे इंसान को ठोकर मार दें जो दोबारा चुनाव जीतने की कोशिश में है। अगर अमरीकी जनता ने यह नहीं किया तो वह भी अंतर्राष्ट्रीय युद्ध अपराधी के जुर्म में भागीदार होगी।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार