14 अप्रैल 2020 - 17:31
ट्रम्प के बुरे दिन, आर्थिक जुनून ने बना दिया मसख़रा, सलाहकार भी कोसने लगे, हमारी तो नसीहत यह है कि चीनी राष्ट्रपति को अब ग्लोबल

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प कोरोना वायरस के मुद्दे को लेकर लगभग रोज़ाना जो प्रेस कान्फ़्रेंस कर रहे हैं वह उनकी अज्ञानता, घमंड और अकड़ की नुमाइश का सरकस बनकर रह गई है।

महाशय आकर खड़े हो जाते हैं और हर विषय में अपनी राय देते हैं। विशेषज्ञों से सलाह लिए बना एलान करते हैं कि इकानोमी को फ़ुलां दिन खोल दिया जाएगा।

ट्रम्प ने कोरोना वायरस की महामारी को नज़रअंदाज़ किया तो आज उसका ख़मियाज़ा भुगत रहे हैं। अमरीका के भीतर अब एसी रिपोर्टें सामने आने लगी हैं जिनमें साफ़ कहा जा रहा है कि 22 हज़ार से अधिक अमरीकी ट्रम्प की अज्ञानता, ढिलाई और सुस्ती की भेंट चढ़ गए क्योंकि उन्होंने कोरोना वायरस के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल कार्यवाही नहीं की।

संक्रामक रोग के वरिष्ठ विशेषज्ञ और ट्रम्प के सलाहकार डाक्टर एंथनी फ़ाउची ने सबसे पहले ख़तरे की घंटी बजा दी थी। उन्होंने सीएनएन से बातचीत में कह दिया कि अगर हमने जल्दी लाक डाउन कर दिया होता तो बहुत से लोंगों की ज़िंदगियां बचाई जा सकती थीं। उनका साफ़ इशारा था कि ट्रम्प ने चेतावनियों को नज़रअंदाज़ कर दिया था।

ट्रम्प एक व्यापारी हैं उन्हें केवल शेयर मार्केट का इंडेक्स दिखाई देता है इंसानी जानें और इंसानी मूल्य उनकी नज़र में कोई महत्व नहीं रखते। इसी चक्कर में इस संकट में वह बुरी तरह फंसे। केवल ट्रम्प ही नहीं बल्कि उनके दूसरे साथियों का भी यही अंजाम हुआ। अमरीकी हेल्थ सिस्टम की सारी हक़ीक़त सामने आ गई। उसके पास न तो चिकत्सा उपकरणों का स्ट्रैटेजिक भंडार है और न संकटों और त्रासदियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन व रिसर्च की मज़बूत बुनियादें।

अतीत में यह होता रहा है कि जब दुनिया के पैसे वाले लोग इलाज करवाना चाहते थे तो अमरीका की मायो क्लिनिक वग़ैर का रुख करते थे क्योंकि उन्हें बहुत माडर्न माना जाता है और वहां दुनिया भर के सबसे अच्छे डाक्टर और विशेषज्ञ होते हैं। मगर यह सारी व्यवस्था कोरोना संकट के समय ध्वस्त हो गई। न इस बीमारी का तत्काल इलाज हो पा रहा है और न ही वेंटीलेटर जैसी मशीनें ही पर्याप्त संख्या में मुहैया हैं।

इस वायरस से बचने की सबसे प्रभावी दवा है घर में बंद रहना और सामाजिक दूरी बनाए रखना मगर इसके लिए दुनिया के विशेषज्ञों की ज़रूरत नहीं है। यही बड़ी क्रान्ति का बिंदु है जो भविष्य में बहुत से चिकित्सा उसूलों को बदल देगा।

ट्रम्प मानवीय दृष्टि से बहुत गिर गए और उनके साथ उनके क़रीबी घटक बोरिस जानसन भी बड़ी गहराई में गिरे जबकि बड़ी विजेता बनकर निकली हैं जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल और न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न।

अरब जगत के पूंजीपतियों और नेताओं के लिए जो अब भी पश्चिम के बड़े बड़े मेडिकल दावों में खोए रहते थे हमारी नसीहत है कि अब पूरब का रुख़ कीजिए, बीजिंग, शंघाई, टोक्यो और भारत जाइए और वहां के अस्पतालों के नाम याद कीजिए, वहां के डाक्टरों से परिचित होइए। क्योंकि अस्ली फ़्यूचर अब वहीं है।

हमें पता है कि दुनिया में करोड़ों लोग हैं जो ट्रम्प के नाम से अवगत हैं जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम कम लोग ही जानते होंगे। हमारा मशविरा है कि इस नाम को अच्छी तरह याद कर लीजिए क्योंकि यह भविष्य की दुनिया के नेता का नाम है जो न तो ट्वीट करता है न प्रेस कान्फ़्रेंसें करता है बस ख़ामोशी से अपना काम करना जानता है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार