कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं कि कोरोना से संक्रमित मरीज़ बिल्कुल ठीक हो गए और उनकी टेस्ट रिपर्टें भी निगेटिव निकलीं, लेकिन कुछ दिन बाद फिर से वे संक्रमित हो गए और टेस्ट रिपर्ट पॉज़िटिव निकली।
इन मामलों ने विशेषज्ञों की नींद उड़ी दी है और इसके उपचार के लिए अपनाए जाने वाले तरीक़ों पर भी पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
दक्षिण कोरिया के डायगू शहर में क़रीब 50 लोग ठीक होने के बाद फिर से कोविड-19 से संक्रमित पाए गए हैं, कोरिया सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (केसीडीसी) ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि क्या वे फिर से संक्रमित हुए हैं, या वायरस ने दोबारा वापसी की है।
केसीडीसी के महानिदेशक जियोंग यून-कियोंग का कहना है कि हम संभावित कारणों की गहन जांच कर रहे हैं, हम इस विषय पर व्यापक अध्ययन कर रहे हैं।
फिर से संक्रमित होने की ख़बरों से आम लोगों के साथ ही विशेषज्ञ भी गहरी चिंता में हैं, बल्कि इससे भी ज़्यादा चिंता वाली बात वायरस का फिर से सक्रिय होना है। इससे संक्रमण से ठीक होने के बाद वायरस से प्रतिरक्षा पर सवाल उठने के अलावा, दुनिया भर में इससे निपटने और इसे फैलने से रोकने के लिए अपनाई गई रणनीतियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती उत्पन्न हो गई है।
दक्षिण कोरिया का अकसर इस महामारी को सफ़लतापूर्वक क़ाबू करने वाले देश के रूप में ज़िक्र किया जा रहा है। इस देश ने सख़्त कोरंटीन, व्यापक परीक्षण और संक्रमितों के संपर्क में आने वालों को ट्रेस करके संक्रमितों और मरने वालों की संख्या को काफ़ी हद तक निंयत्रित कर लिया है। यहां संक्रमितों की कुल संख्या 10,400 है, जबकि 204 लोगों की मौत हो चुकी है।
चीन से भी कुछ ऐसी ही परेशान करने वाली ख़बरें आ रही हैं, जहां से दिसम्बर 2019 में इस वायरस के फैलने की शुरूआत हुई थी। फ़ुडन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक टीम ने शंघाई के एक अस्पताल से 175 मरीज़ों के ख़ून के नमूनों का विश्लेषण किया और पाया कि लगभग एक तिहाई में अप्रत्याशित रूप से एंटीबॉडी का स्तर कम था, और कम से कम 10 मामलों में पूर्ण रूप से एंटीबॉडी नदारद था।
टीम ने सोमवार को जारी एक प्रारंभिक शोध पत्र में कहा है कि क्या इन मरीज़ों में वायरस की वापसी या उनके फिर से संक्रमित होने का ख़तरा ज़्यादा है, इस बात की जांच की जा रही है।
वैज्ञानिकों की इस टीम का कहना है कि उसने कोविड-19 के मरीज़ो में एंटीबॉडी स्तर का दुनिया का पहला व्यवस्थित अध्ययन किया है।
अगर कुछ मरीज़ एंटीबॉडी विकसित नहीं कर पायेंगे, तो इसके टीकाकरण और "सामूहिक प्रतिरक्षा" (herd immunity) दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
चीन में आधिकारिक तौर पर वायरस से संक्रमण के लगभग 83,000 मामले और 3,339 मौतें दर्ज की गई हैं।