अमरीका की होली नेम्ज़ युनिवर्सिटी में इंटरनैश्नल रिलेशंस के शिक्षक आर्थर लोपेज़ ने कहा कि बीस साल से यह आशंका जताई जा रही है कि दुनिया में कोई महामारी फैल सकती है जिसके मद्देनज़र क्यूबा ने वाइट शर्ट आर्मी तैयार की है। इस देश ने स्वास्थ्य और शिक्षा को अपनी केन्द्रीय रणनीति बनाया है।
शीत युद्ध समाप्त होने के बाद क्यूबा ने अपनी यह ताक़त विकसित की और फिर यह क्यूबा की विदेश नीति का मज़बूत स्तंभ बन गई।
आज क्यूबा को अपनी इस रणनीति का फल मिल रहा है। हलिया दिनों इस देश ने इटली सहित 14 देशों में अपने 593 चिकित्सा विशेषज्ञ भेजे हैं।
फ़्रांस ने गूयाना, मार्टीनिक, ग्वादीलोप, सैन मार्टिन, सैन बार्टीलीमी और सैन पियारोमैकलन राज्यों में क्यूबा के डाक्टरों की मदद ली है।
अमरीका में कटरीना तूफ़ान आने के बाद हेनरी रीव के नाम से डाक्टरों की एक बड़ी टीम बनाई गई थी जिसका उद्देश्य तूफ़ान से प्रभावित इलाक़ों में चिकित्सा योगदान देना था मगर अमरीका ने उस समय मदद लेने से इंकार कर दिया था। इस टीम ने कई देशों की चिकित्सा क्षेत्रों में मदद की। वर्ष 2014 में इस टीम ने अफ़्रीक़ी देशों में इबोला वायरस फैलने के बाद विश्व स्वास्थय संगठन के आग्रह पर सेवा की।
रोचक बात यह है कि क्यूबा के डाक्टर केवल आपदा के समय मदद नहीं करते बल्कि पूरे साल क्यूबा के 45 हज़ार से अधिक डाक्टर दुनिया के 67 देशों में चिकित्सा सेवाएं देते हैं। क्यूबा 1960 के दशक से यह सहायता मुफ़्त में देता आया है। वर्ष 2000 से क्यूबा सरकार ने आर्थिक संकट बढ़ जाने के बाद धनी देशों से अपनी सेवा के बदले पैसे चार्ज करना शुरू किए। अब क्यूबा के लिए यह आमदनी का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। वर्ष 2018 में इस देश को 6 अरब डालर से अधिक रक़म इस माध्यम से हासिल हुई।
क्यूबा के डाक्टरों को अमरीका के प्रतिबंधों का भी सामना करना पड़ रहा है। ट्रम्प ने यह प्रतिबंध और भी कड़े कर दिए हैं। वाशिंग्टन आरोप लगाता है कि यह डाक्टर दुनिया के देशों में क्यूबा के राजनैतिक कार्यकर्ता के रूप में काम करते हैं। अमरीका के वर्तमान क़रीबी घटक ब्राज़ील का आरोप है कि इनमें क्यूबा के जासूस शामिल रहते हैं।
क्यूबा ने 1963 से 2004 के बीच यमन, गिनी, इथोपिया, गिनी बिसाव, घाना, यूगांडा और गांबिया में बहुत से अस्पताल और चिकित्सा केन्द्र बनाए।
डब्ल्यूएचओ की पूर्व अध्यक्ष मारग्रेट चान के अनुसार क्यूबा की चिकित्सा सहायताओं की वजह से दुनिया के बहुत से देशों में स्वास्थ्य स्थिति में सुधार आया है।
स्रोतः अलजज़ीरा और एएफ़पी