मलेशिया के पूर्व प्रधान मंत्री महातीर मोहम्मद ने एक इंटरव्यू में अपने देश की जनता में ब्रिटेन से नफ़रत का कारण, इस देश की उस साज़िश को बताया जिसका लक्ष्य मलेशिया का अंजाम फ़िलिस्तीन जैसा करना था।
तस्नीम न्यूज़ के मुताबिक़, महातीर मोहम्मद ने ब्रिटेन के संबंध में उनके रवैय में आए नकारात्मक बद्लाव के बारे में कहा कि ब्रिटेन मलेशिया के ख़िलाफ़ एक साज़िश के ज़रिए इस देश का अंजाम वैसा ही करना चाहता था जैसा उसने 40 के दशक में फ़िलिस्तीन का किया।
उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीनियों को उनके वतन से दूर करने और उनके देश को अल्पसंख्यकों के हवाले करने से पहले, अल्पसंख्यकों के फ़िलिस्तीन में दाख़िल होने की पृष्ठिभूमि तैयार की गयी थी।
महातीर मोहम्मद ने कहा कि 40 के दशक में मलेशिया की जनता के मन में ब्रिटेन की छवि बदलने का सिर्फ़ यही एक कारण नहीं था, बल्कि उस समय मलेशिया के लोगों को महसूस हुआ कि ब्रिटेन उनका अपमान करता है, उन्हें सुस्त व भरोसा न करने की नज़र से देखता है, यहां तक कि भारतीयों और चीनियों में यह साहस पैदा किया गया कि वे जिन्दगी गुज़ारने के लिए मलेशिया में दाख़िल हों।
मलेशिया के पूर्व प्रधान मंत्री ने कहा कि दसियों लाख मलेशियाई नागरिक, जिस समय ब्रिटेन उनके देश को बांटने और इस देश पर चीनी व भारतीय अल्पसंख्यकों का वर्चस्व क़ायम करने की कोशिश कर रहा था, यह समझ गए कि ब्रिटेन उनके ख़िलाफ़ है और मलेशिया का अंजाम भी वह फिलिस्तीन जैसा करना चाहता है।
महातीर मोहम्मद ने कहाः"मलेशियाई राष्ट्र ब्रिटेन की साज़िश को भांप गया और ब्रिटेन की मलेशिया संघ की योजना को रद्द कर दिया और ब्रिटेन को मलेशिया से निकलने पर मजबूर कर दिया और इस तरह 1957 में मलेशिया से ब्रिटेन के साम्राज्य का अंत हुआ।