विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में यमन जैसी त्रासदी कहीं और नहीं देखी गयी है लेकिन अब उस से बड़ी त्रासदी का जनम हो रहा है, यमन में पानी का भारी अभाव है और महामारी वहां पहुंच गयी तो फिर यमन तबाह हो जाएगा।
यमन में सऊदी अरब के हमले के आरंभ के पांच बरसों बाद हर क्षेत्र में तबाही ही तबाही है और सब से अधिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में। यह देश के 33 लाख लोग स्कूलों और तंबुओं में ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं जहां कालरा जैसे न जाने कितने रोगों से वह जूझ रहे हैं।
डॉक्टर्स विद आउट बॉर्डर यानी एमएसएफ में यमन, इराक़ और जार्डन की प्रभारी कैरोलीन सेगीन का कहना है कि यमनियों के लिए साफ पानी उपलब्ध ही नहीं है और बहुत से लोगों के लिए तो एक साबून की व्यवस्था कर पाना भी कठिन है।
वह पूछती हैं कि हम इन लोगों को कैसे अच्छी तरह से हाथ धोने की सिफारिश करें जब उनके पास हाथ धोने के लिए न तो पानी है और न ही साबुन!
यमन पर हमले के पांचवे वर्ष के आरंभ में यूनिसेफ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि यमन में एक करोड़ अस्सी लाख लोगों के लिए जिसमें 92 लाख बच्चे हैं, पानी तक पहुंच बना पाना बेहद कठिन है और उनके लिए स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
उन बच्चों में से मुहम्मद अली तैयब भी है जो राजधानी सनआ के पश्चिमोत्तरी प्रांत हिज्जा में रहता है। वह हर रोज़ अपनी बहन के साथ अपने गधे को लेकर गांव से निकलता है, पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि पानी की तलाश के लिए फिर उसे जो पानी मिलता है वह घर ले आता है, यह पानी गंदा भी हो सकता है। कभी कभी तो इन बच्चों को को पानी लाने के लिए तीन किलोमीटर से भी अधिक दूर जाना पड़ता है।
मात्र ग्यारह साल का यह बच्चा, घंटों लाइन में ही खड़ा होता है और जब उसकी बारी आती है तो वह प्लास्टिक का वह डिब्बा पानी से भर लेता है जिसमें कभी तेल रखा जाता था।
वह बताता है कि सुबह सुबह सब से पहले मैं अपने गधे को तैयार करता हूं। फिर साढ़े सात बजे पानी के लिए घर से निकल जाता हूं, वापसी तक साढ़े दस बज जाते हैं।
यमन में यह कोई एक परिवार नहीं है इस तरह के न जाने कितने परिवार हैं तो बूंद बूंद के लिए तरसते हैं, उनके लिए पीने के पानी की व्यवस्था कठिन है, कोरोना से बचने के लिए हाथ धोने का पानी कहां से लाएं? साबुन के बारे में तो सोचना भी कठिन है।
दर अस्ल सऊदी अरब ने यमन पर हमले के दौरान पानी के भंडारों का विशेष रूप से निशाना बनाया है जिसकी वजह से पानी की कमी से जूझ रहे यमन में पानी एक बहुत की क़ीमती चीज़ बन गया है।
यमन में युद्ध के आरंभ से अब तक दसियों हज़ार लोग तो महामारी में मारे गये हैं, भुखमरी से हज़ारों लोग मर चुके हैं।
जअदा में स्वास्थ्य केन्द्र के प्रमुख मुहम्मद अक़ील बताते हैं कि उनके सेंटर पर हर रोज़ कम से कम 300 मरीज़ लाए जाते हैं और उनमें से अधिकांश को गंदा पानी पीने से होने वाली बीमारी की शिकायत होती है।
अब इस तरह की समस्याओं से जूझ रहे यमन में अगर कोरोना वायरस भी पहुंच गया तो क्या हो सकता है इसकी कल्पना भी दिल को दहला देती है।
रेडक्रास सोसायटी के ट्वीटर एकांउट पर लिखा है कि बार बार हाथ धुलना कोरोना से बचाव का सब से अच्छ रास्ता है तो फिर यमन की आधी आबादी क्या करे जिसे पीने के लिए भी पानी नहीं मिलता?