23 मार्च 2020 - 13:25
शहीद जनरल सुलैमानी की हत्या का एक और पहलू समाने आया ...

एक अमरीकी पत्रिका ने शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी पर हुए आतंकी हमले के एक नए पहलू पर प्रकाश डाला है।

अमरीका से प्रकाशित होने वाली पत्रिका "न्यूज़ वीक" ने इस देश के एक गुप्तचर अधिकारी के हवाले से, जिसने अपना नाम प्रकट न किए जाने की शर्त रखी है, लिखा है कि जनरल सुलैमानी की शहादत की कार्यवाही इतनी गोपनीय थी कि इसके बारे में सिर्फ़ कुछ ही लोगों को ज्ञान था, यहां तकि अमरीकी सेना के जासूसी उपग्रहों को भी इस कार्यवाही के बारे में कोई सूचना नहीं थी। अधिकारी ने बताया कि यह कार्यवाही अंजाम देने वाले ड्रोन "एमक्यू-9" पर जीपीएस उपकरण भी नहीं लगाया था ताकि इसे पहचान कर ट्रेस न किया जा सके, यहां तक कि अमरीका का रडार सिस्टमों को भी, जिनका काम अपने और दुश्मन के विमानों को पहचानना है, इस ड्रोन की उड़ान का कोई सिग्नल नहीं मिला था।

 

अमरीका के एक सैन्य अधिकारी ने भी न्यूज़ वीक को बताया कि हमें सैन्य दृष्टि से तैयार रहने के लिए कहा गया था। दस मिनट बाद जब हम अलजज़ीरा टीवी देख रहे थे, तब हमारी समझ में आया कि बात वह नहीं थी, जो हम समझ रहे थे। याद रहे कि आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी को इराक़ के स्वयं सेवी बल के उप कमांडर अबू महदी अलमुहंदिस व अन्य आठ लोगों के साथ तीन जनवरी को बग़दाद हवाई अड्डे के पास अमरीका की आतंकी सेना ने एक ड्रोन हमले में शहीद कर दिया था। शहीद सुलैमानी, इराक़ सरकार के औपचारिक निमंत्रण पर इस देश की यात्रा पर गए थे। अमरीकी युद्ध मंत्रालय पेंटागन ने घोषणा की थी कि इस आतंकी कार्यवाही का आदेश, स्वयं अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने दिया था।