आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनेई की वेबसाइट पर उनके दो नए फ़त्वे जारी किए गए हैं जो दो सवालों के जवाब में दिए गए हैं। पहले प्रश्न में पूछा गया है कि अगर कोरोना के बारे में चिंता मौजूद हो और उसके नियंत्रण का समय निर्धारित न हो तो क्या जिन पर हज अनिवार्य हो चुका है, उन्हें हज के लिए जाना चाहिए? इसके जवाब में वरिष्ठ नेता ने अपने फ़त्वे में कहा है कि जब तक ज़िम्मेदार संस्थाओं की तरफ़ से रोक न लगाई जाए, उन लोगों को हज की ईश्वरीय और अनिवार्य उपासना के लिए ज़रूर जाना चाहिए।
दूसरा सवाल कोरोना के संकट के दौरान यात्रा के वैध या अवैध होने के बारे में पूछा गया है। सवाल में कहा गया है कि जब देश के अधिकारी लोगों को कोरोना के फैलाव से बचने के लिए यात्रा से रोक रहे हों तो ऐसे में क्या यात्रा करना पाप है? और क्या इस यात्रा में नमाज़ पूरी पढ़ी जाएगी? आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनेई ने इस सवाल के जवाब में फ़त्वा देते हुए कहा है कि अगर स्वास्थ्य मंत्रालय और कोरोना से मुक़ाबले की राष्ट्रीय परिषद के उपायों के अनुसार, बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए अनावश्यक यात्राओं पर रोक लगाई गई हो तो इस आदेश का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है और इस प्रकार की यात्रा अवैध होगी और यात्रा के दौरान नमाज़ भी पूरी अदा करनी होगी।