13 मार्च 2020 - 14:35
कोरोना वायरस फैलाने के मामले में अगर चीन का आरोप सही है तो यह मानवता के ख़िलाफ़ अमरीका का युद्ध अपराध है, चीन के सवालों में दम ह

अगर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता औपचारिक रूप से कह रहे हैं कि वूहान शहर में कोरोना वायरस फैलाने में अमरीकी सेना का हाथ हो सकता है तो यह आरोप बहुत गंभीर है।

अंग्रेज़ी भाषा में किए गए ट्वीट में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमरीका और खुद ट्रम्प के मानवता के ख़िलाफ़ भयानक अपराध में लिप्त होने की ओर संकेत किया है इसलिए कि यह महामारी दुनिया के अधिकतर देशों और बाज़ारों में छा गई है और अब तक 3 हज़ार से अधिक इंसानी जानें इस महामारी के कारण जा चुकी हैं।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमरीका से जो सवाल पूछे हैं वह बिल्कुल वाजिब लगते हैं और इन पर विचार करने की ज़रूरत है। प्रवक्ता का यह सवाल महत्वपूर्ण है कि अमरीका में यह वायरस पहली बार कब देखा गया? कितने लोग इस वायरस की चपेट में आए? उन अस्पतालों के नाम क्या हैं जहां इस वायरस से ग्रस्त लोगों को रखा गया है?

पूरी दुनिया को इन सवालों के जवाब का इंतेज़ार है। अमरीका जिसकी आबादी 30 करोड़ से ज़्यादा है उसे इस वायरस से अभी बहुत अधिक नुक़सान नहीं पहुंचा है, दूसरी ओर चीन को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प अपना सबसे बड़ा दुशमन मानते हैं, चीन की अर्थ व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए अमरीका ने आर्थिक युद्ध छेड़ रखा है। ट्रम्प के पूर्वजों ने इसी तरह प्लेग की बीमारी फैलाई थी और इसी बीमारी की मदद से उन्होंने करोड़ों रेड इंडियंस को मार डाला था।

चीन की अर्थ व्यवस्था बहुत तेज़ी से नंबर वन इकानोमी बनने की ओर बढ़ रही है। अमरीका इस स्थान पर दूसरे विश्व युद्ध के बाद से जमा हुआ है। चीनी प्रशासन की योजना है कि सिल्क रोड को पुनरजीवित करके अमरीका को घेर लिया जाए और नई वित्तीय व्यवस्था तैयार की जाए जिसके नतीजे में डालर का वर्चस्व समाप्त हो जाए। यह सारी परिस्थितियां एसी हैं जिनमें ट्रम्प जैसा व्यक्ति युद्ध अपराध करने से नहीं हिचकिचाएगा।

चीन साबित कर चुका है कि वह विश्व शक्ति है। उसने कुछ ही हफ़्तों में इस वायरस पर क़ाबू पा लिया और मौतों को 3169 तक पहुंचते पहुंचते पूरी तरह कंट्रोल कर लिया। चीन ने 80 हज़ार संक्रमित लोगों का इलाज करके उन्हें पूरी तरह ठीक कर दिया और अब वुहान शहर इस बीमारी से मुक्त हो चुका है।

चीन ने इस वायरस से निपटने के लिए बहुत ख़ामोशी और बड़ी मेहनत से काम किया। चीन की ओर से इस मामले में कोई दावा या आरोप अब तक सामने नहीं आया था, इसका मतलब यह है कि चीन ने सारे राज़ हिफ़ाज़त के साथ रखे हैं और अगर अब उसने आरोप लगाया है तो निश्चित रूप से उसके पास ठोस साक्ष्य हैं।

चीन के आरोपों की तत्काल अंतर्राष्ट्रीय जांच होनी चाहिए और जांच का नतीजा सारी दुनिया के सामने आना चाहिए। यूरोप और रूस को भी चाहिए कि इस पहलू पर ज़ोर दें और हर संभव तरीक़े से इस मामले में सहयोग करें।

अमरीका दुनिया का एकमात्र देश है जिसने परमाणु बम से हमला किया तो वह कोरोना बम का भी प्रयोग करने वाला हो सकता है।

हम अरब और मुसलमान होने की हैसियत से अमरीकी साज़िशों का बार बार निशाना बन चुके हैं इसलिए हमें इस प्रकार के आरोपों पर विश्वास है। हमने इराक़ में महाविनाश के हथियार होने के अमरीकी झूठ और साज़िश को देखा है। हमारे मशहूर शायर महमूद दरवीश ने बिल्कुल सही कहा था कि प्लेग ख़ुद अमरीका है और अमरीका ख़ुद प्लेग है। हमें कोई हैरत नहीं होगी अगर किसी दिन यह तथ्य सामने आता है कि कोरोना वायरस अमरीका ने ही बनाया था और रूस तथा ईरान की अर्थ व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने के लिए इन देशों में यह वायरस फैला दिया था।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के मशहूर लेखक व टीकाकार