प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत की संसद में नियम-193 के तहत बुधवार को दिल्ली में हुई हिंसा पर चर्चा हुई जिसके बाद भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी सरकार पर उठे तमाम सवालों के जवाब दिए और अपनी सरकार का पक्ष रखा। बहस के दौरान कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। अमित शाह ने बहस के अंत में अपने जवाब की शुरुआत दंगा पीड़ितों के परिवार वालों के प्रति सहानुभूति जताते हुए की और कहा कि दिल्ली हिंसा को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि होली पर किसी की भी भावना ना भड़के, इसलिए हमने दंगों पर अब चर्चा की है। अमित शाह ने यह भी दावा किया कि, 25 फ़रवरी की रात 11 बजे के बाद से कोई हिंसा नहीं हुई है।
भारतीय गृह मंत्री ने दिल्ली पुलिस की तारीफ़ करते हुए कहा कि, दिल्ली पुलिस ने दंगे को दिल्ली के चार प्रतिशत क्षेत्र और 13 प्रतिशत आबादी के बीच ही सीमित रखा। उन्होंने कहा कि, दिल्ली पुलिस ने अच्छा काम किया है। दिल्ली पुलिस ने पहली सूचना मिलने के बाद केवल 36 घंटे में पूरी स्थिति पर क़ाबू पा लिया। उन्होंने कहा कि, दिल्ली पुलिस ने अब तक 700 से ज़्यादा एफ़आईआर दर्ज की हैं, 2647 लोग हिरासत में लिए गए हैं, फ़ोन कॉल के डिटेल निकाली जा रही हैं, लोगों से दंगों से जुड़ी फुटेज मांगी जा रही है ताकि जांच बेहतर ढंग से की जा सके। अमित शाह ने कहा कि, 1100 से ज़्यादा लोगों की पहचान की जा चुकी है जिनमें से 300 से ज़्यादा लोग यूपी से आए थे।
भारत के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के संसद में नेता अधीर रंजन ने कहा, "काफ़ी समय से इस चर्चा की माँग थी, होली का त्योहार ख़त्म हुआ, पर दिल्ली की ख़ून की होली हमारा पीछा नहीं छोड़ती। उन्होंने कहा कि, सारा हिंदुस्ताना बैचेन है और जानना चाहता है कि कैसे यह घटना हुई और सरकार क्या कार्रवाई कर रही है कि दोबारा ऐसी घटना ना हो।" उन्होंने कहा कि 'हिंसा में किसी की जय नहीं होती, पराजय सिर्फ़ इंसानियत की होती है।' अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए अधीर रंजन ने कहा कि 'सरकार कोशिश करती तो दिल्ली में हिंसा रोकी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि, यह देश की राजधानी है, यहां की पुलिस को हम मॉर्डन मानते हैं, हथियार की कोई कमी नहीं है, फिर यह घटना क्यों घटी? रंजन ने कहा कि, तीन दिन लगातार यह घटना कैसे घटी, सरकार को जवाब देना होगा, गृह मंत्री अमित शाह तीन दिन तक कहां थे, दिल्ली के क़ानून की ज़िम्मेदारी उनके पास है।'
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में इसी वर्ष फ़रवरी के अंत में उस समय हिंसा भड़क गई जब इस देश की मोदी सरकार द्वारा बनाए गए विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून का दो महीनों से अधिक से समय से शांतिपूर्ण तरीक़े से जारी विरोध-प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर कट्टरपंथी हिन्दू गुटों ने पुलिस के साथ मिलकर उनपर हमला कर दिया था। विशेष बात यह है कि इन्हीं दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प भारत के दौरे पर आए हुए थे।