7 मार्च 2020 - 13:48
ईरान से फिर उठी भारतीय मुसलमानों के लिए आवाज़, संयुक्त राष्ट्र संघ के  महासचिव को लिखा गया पत्र...

तेहरान की युनिवर्सिटियों के कई प्रोफेसरों और शिक्षकों ने संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के नाम एक पत्र में मांग की है कि भारत के मुसलमानों के खिलाफ नस्लभेद के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ क़दम बढ़ाए।

पत्र में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एन्तोनियो गुटरेस से मांग की गयी है कि हमें आशा है कि संयुक्त राष्ट्र संघ, भारत में मुसलमानों  के खिलाफ क्रूरतापूर्ण पूर्व जातीय सफाये और सांप्रदायिकता के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कदम को एजेन्डे में शामिल करे।

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव को लिया गया पत्र इस प्रकार हैः

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव, श्रीमान एन्तोनियो गुटरेस!

ऐसी हालत में कि जब पूरी दुनिया में शांति व सुरक्षा स्थापित रखना सब का कर्तव्य है, भारत में कट्टरपंथी हिन्दुओं के हाथों महिलाओं और बच्चों सहित लोगों की बर्बरता से हत्या, उन्हें यातना दिये जाने विशेष कर एक मुस्लिम महिला और उसके बच्चे को जीवित गाड़ने की वीडियो क्लिप और फोटो के सामने आने से विश्व भर के स्वतंत्रता प्रेमियों के दिल घायल हो गये हैं। अफसोस की बात है कि यह त्रासदी पहली बार नहीं हो रही है लेकिन हमारी कामना है कि यह भारत और पूरी दुनिया में अंतिम बार हो।

बड़े अफसोस की बात है कि भारत की राजधानी में पिछले हफ्ते फूटने वाली हिंसा कई दिनों तक जारी रही और हिन्दु कट्टरपंथी गुंडों ने मुसलमानों के घरों, दुकानों और मस्जिदों पर हमले किये हैं। हम दिल्ली में ऐसी हिंसा देख रहे हैं जिसमें कम से कम 46 मुसलमान मारे गये और सैंकड़ों घायल हुए। इसके बावजूद अविश्वस्नीय रूप से मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए भारत सरकार की ओर से  तत्काल रूप से कोई सरकारी और प्रभावशाली क़दम नहीं उठाया जा रहा है।

मानवाधिकार घोषणापत्र के अनुच्छेद 5 के अनुसार, किसी को यातना नहीं दी जा सकती किसी को बर्बरता व अमानवीय रूप से दंडित या किसी का अपमान नहीं किया जा सकता।