6 मार्च 2020 - 14:21
चीनी वैज्ञानिकों की महत्व पूर्ण खोज, कोरोना की कई किस्मों का पता चला, एक किस्म बेहद आक्रामक, दुनिया हैरान!

नेशनल साइंस रीवीव में प्रकाशित होने वाले एक अध्धयन के अनुसार एेसा लगता है कि कोरोना वायरस मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं!

अध्ययन के अनुसार दोनों प्रकार के कोरोना वायरस, भौगोलिक परिस्थितियों और संक्रमण के तरीक़े के अनुसार अलग अलग देशों में अलग अलग प्रभाव डालते हैं और इससे मरने वालों  की संख्या पर भी असर पड़ता है। 

चीनी वैज्ञानिकों ने शोध करके इस बात का पता लगया है कि कोरोना वायरस की दोनों क़िस्में, शरीर पर अलग अलग असर डालती हैं, एक क़िस्म का कोरोना वायरस अधिक आक्रमक है जो  बड़े पैमाने पर लोगों में संक्रमण फैला सकता है। 

साउथ चायना मार्निंग ने लिखा है कि बीजिंग युनिवर्सिटी और शंघाई के एक अध्धयन केन्द्र के सहयोग से किये गये शोध में पता चलता है कि कोरोना वायरस संक्रमण दो प्रकार का होता है एक " एल " और दूसरा " एस " ।

" एल " प्रकार का कोरोना वायरस अधिक आक्रामक है और वूहान में आरंभ में यही वायरस सब से अधिक फैला है अर्थात कोरोना के फैलाव का शिकार होने वाले 70 प्रतिशत लोगों में " एल" प्रकार का कोरोना वायरस मिला है जबकि लगभग 30 प्रतिशत लोगों में " एस" प्रकार का कोरोना वायरस मिला है जो कम आक्रामक होता है। 

शोधकर्ताओं को पता चला है कि जनवरी के आरंभ होते ही " एल" प्रकार के वायरस का फैलाव कम हुआ है और अब कोरोना वायरस का " एस" माॅडल अधिक फैल रहा है जो वास्तव में उसका पुराना रूप भी है। 

अध्ययन कर्ताओं का कहना है कि इस खोज से उपचार में आसानी होगी क्योंकि संक्रमित व्यक्ति में " एल" प्रकार के वायरस का पता चलते ही उपचार में उसे प्राथमिकता दी जाएगी क्योंकि यह वायरस अधिक खतरनाक होता है। 

अब सवाल यह है कि अगर " एल " कोरोना वायरस अधिक खतरनाक और भयानक हैं तो क्या वजह है कि वूहान में " एस" की तुलना में " एल " कम तेज़ी से फैल रहा है? 

अध्ययन कर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि इसकी वजह व्यापक स्तर पर वायरस से निपटने के लिए उठाए  गये क़दम हो सकते हैं। 

इन चीनी वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के 103 जिनोम का विश्लेषण किया जिससे वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस को बेहतर तौर पर समझने के लिए अधिक अध्य्यन की ज़रूरत है।