सीरियाई सेना के एअर डिफेन्स सिस्टम ने इस देश के उत्तर में स्थित इदलिब प्रांत में तुर्की के चार ड्रोन विमानों को मार गिराया है।
सीरिया की समाचार एजेन्सी साना ने रिपोर्ट दी है कि तुर्की और सीरियाई सैनिकों और तुर्की का समर्थन प्राप्त आतंकवादियों के मध्य इदलिब प्रांत में भीषण लड़ाई हुई।
इसी बीच सीरिया के प्रतिरक्षामंत्रालय के एक सूत्र ने बताया है कि इदलिब प्रांत को उड़ान निषेध क्षेत्र घोषित किया गया है और जो भी ड्रोन या युद्धक विमान इस क्षेत्र में उड़ेगा उसे मार गिराया जायेगा।
इदलिब प्रांत में सीरियाई सेना और उसके घटकों की कार्यवाहियों को तुर्की और आतंकवादियों की नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा है।
सीरिया में तुर्की की गणना आतंकवादियों के मूल समर्थक के रूप में होती है।
तुर्की की सेना ने इदलिब प्रांत में आतंकवादियों के समर्थन के परिप्रेक्ष्य में कई बार सीरियाई सेना के ठिकानों पर हमला किया है और अब भी सीरिया के उत्तर के कुछ क्षेत्रों पर तुर्क सैनिकों का क़ब्ज़ा है।
जानकार हल्कों का मानना है कि अगर आतंकवादियों को विदेशियों का व्यापक समर्थन न होता तो बहुत पहले आतंकवादियों का सफाया हो गया होता।
गत तीन वर्षों के दौरान तुर्की की सेना ने बारमबार सीरियाई सेना के ठिकानों पर आक्रमण किया है जिस पर तुर्की को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
ज्ञात रहे कि सीरिया का इदलिब प्रांत आतंकवादियों का अंतिम ठिकाना है।
गत शुक्रवार को सीरिया की सेना ने इदलिब प्रांत में आतंकवादियों के ठिकानों पर हवाई हमला किया था जिसमें तुर्की के 33 सैनिक भी मारे गये थे।
इस हमले पर फ्रांस के राष्ट्रपति एमानोएल मैक्रां ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन बताया था।
सवाल यह पैदा होता है कि अगर आतंकवादियों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है तो क्या आतंकवादियों की ट्रेनिंग, उन्हें आधुनिकतम हथियारों से लैस करना और इसी प्रकार उनका व्यापक समर्थन अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मुताबिक़ है?
जानकार हल्कों का कहना है कि दोनों चीज़ें एक साथ अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक तो नहीं हो सकतीं तो फ्रांस के राष्ट्रपति या उनके जैसी सोच रखने वालों को इस प्रश्न का जवाब देना चाहिये।