राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि समाज पर ज़बरदस्ती अपने विचारों को थोपना एक प्रकार की विकृति है जबकि भ्रातृत्व भाव पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ता है।
राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि ‘‘समाज में कभी-कभी इस प्रकार की विकृतियां पैदा होती हैं कि ज़बरदस्ती अपने विचारों को थोपने की बात सामने आती है। अपनी बात को ग़लत समझते हुए भी यह कहना उचित नहीं है कि हमारी ही बात सही है।
उन्होंने कहा कि गांधी जी कहा करते थे कि यदि आपको मेरी बात सही लगती है तो उस बात को अपना लीजिए और फिर यह कहिए कि यह मैंने कही है, यह मत कहिए कि यह गांधी जी ने कहा है क्योंकि वह बात आपकी हो गयी। वह आपके आचरण में आ गयी। यदि इस प्रकार हमारा समाज आगे बढ़ेगा तो ही उचित होगा।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘भ्रातृत्व भाव ही पूरे देश को जोड़ता है।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘मनुष्य होने के नाते हमें यह प्रयास करना चाहिए कि इंसान में कोई अंतर न किया जाए। आचरण में अंतर नहीं आना चाहिये।
उन्होंने कहा कि देश बदल रहा है और हम सब को भी बदलना है। भारत के राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि जब देश बदलता है तो संसाधनों की आवश्यकता होती है। हमारे पास संसाधन उतने नहीं हैं। जनसंख्या बढ़ती जा रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के संसाधन हम अपने बच्चों को दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आप अपने बच्चों को अवश्य पढ़ाइये और उनको अच्छा आचरण दीजिए।’’ उन्होंने कहा कि शिक्षा का ध्येय छात्र को अच्छा इंसान बनाना होना चाहिए, अच्छा इंसान अगर डॉक्टर बन गया तो वह अच्छा डॉक्टर होगा। अच्छा इंसान अगर नेता बन गया तो वह अच्छा नेता होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि अच्छा इंसान, अच्छा पति और पिता भी होगा। बेटी अच्छी इंसान होगी तो अच्छी बहू और अच्छी सास भी होगी।’’