सीरिया संकट की शुरुआत में अर्दोग़ान ने अपने मूल्यांकन के आधार पर हस्तक्षेप शुरू किया और सीरिया के भीतर कई संगठन बना डाले जो सरकार के विरुद्ध युद्ध में कूद पड़े लेकिन दरअस्ल हुआ यह कि तुर्की की तरह क़तर, इमारात, सऊदी अरब और इस्राईल ने भी अपने अपने संगठन तैयार कर लिए और अपने अपने एजेंडे में व्यस्त हो गए।
अर्दोग़ान की बात की जाए तो उनकी योजना यह थी कि सीरियाई सरकार गिर जाए और उसके बाद जो सरकार बने वह उनकी इच्छा के अनुसार बल्कि उनके द्वारा समर्थित संगठनों की भागीदारी से बने ताकि इस तरह सीरिया में वह प्राक्सी युद्ध के बाद प्राक्सी शासन शुरू कर दें।
यह योजना अर्दोग़ान के लिए इतनी लुभावनी थी कि वह अन्नुस्रा संगठन और दाइश के आतंकियों को गले लगाने से भी नहीं हिचकिचाए। आज पांसा पलट चुका है। सीरिया के ख़िलाफ़ तैयार की जाने वाली साज़िश नाकाम हो चुकी है। सीरियाई सेना आतंकियों के आख़िरी ठिकाने इदलिब से चरमपंथियों को मार भगाने की तैयारी पूरी कर चुकी है और उसने इदलिब के आस पास के महत्वपूर्ण इलाक़ों को अपने नियंत्रण में ले लिया है जो इससे पहले तुर्की की मदद से चरमपंथियों के क़ब्ज़े में चले गए थे।
इदलिब में मौजूद आतंकियों की मदद के लिए तुर्की ने अपनी सैनिक गतिविधियां तेज़ कर दी हैं। तुर्क सैनिक सीरियाई सीमा के निकट अपनी पोज़ीशनें मज़बूत कर रहे हैं। तुर्की ने सीरिया के भीतर चेकपोस्टें बना रखी हैं और संयुक्त राष्ट्र संघ में तुर्की के राजदूत फ़रीदून सीनीरली ने कहा कि उनका देश पश्चिमोत्तरी सीरिया में मौजूद अपने सैनिकों को बाहर नहीं निकालेगा। उन्होंने धमकी दी कि यदि सीरिया के भीतर मौजूद तुर्क सैनिकों को कोई नुक़सान पहुंचा तो कठोर हमला किया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र में सीरिया के राजदूत बश्शार जाफ़री ने कहा कि सुरक्षा परिषद इदलिब के बारे में तो बैठक कर रही है लेकिन वह सीरिया के भीतर तुर्क सैनिकों के क़ब्ज़े और लूटमार पर ख़ामोश है।
तुर्की चाहता है कि ईरान और रूस मध्यस्थता करें और सीरियाई सेना इदलिब को अपने नियंत्रण में लेने का आप्रेशन रोक दे क्योंकि तुर्की को पूरा विश्वास हो चुका है कि सीरियाई सेना बहुत आसानी ने उन आतंकियों को खदेड़ सकती है जिन्हें तुर्की ने इदलिब और आसपास के इलाक़ों में तैनात कर रखा है।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ और संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के राजदूत मजीद तख़्तरवांची ने अपने बयानों में कहा है कि सीरिया और तुर्की के बीच तनाव का हल चाहते हैं लेकिन दोनों ही अधिकारियों ने यह साफ़ कर दिया है कि आतंकियों को हालात का फ़ायदा उठाने का मौक़ा नहीं देना चाहिए।
इससे यह बात साफ़ हो जाती है कि तुर्की के पास अब एक ही रास्ता बचा है कि आतंकियों से इदलिब को आज़ाद कराने के सीरियाई सेना के आप्रेशन पर ख़ामोश हो जाए क्योंकि चरमपंथियों की हमदर्दी से वह कुछ हासिल नहीं कर सकेगा।
इदलिब सीरिया की धरती है और उसे अपने नियंत्रण में रखने का उसे पूरा अधिकार है।