इस्राईली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने एन्टेबे में सूडान की राष्ट्रीय परिषद के प्रमुख अब्दुल फ़त्ताह अल-बुरहान से मुलाक़ात की।
इस्राईल ने एक आधिकारिक बयान जारी करके कहा है कि तेल-अवीव और ख़रतूम सहयोग शुरू करने और रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में क़दम आगे बढ़ाने के लिए राज़ी हो गए हैं।
नेतनयाहू ने ट्वीट कियाः इस्राईल और सूडान आपसी सहयोग शुरू करने पर सहमत हो गए हैं, जिसके नतीजे में आगे चलकर रिश्ते सामान्य हो जायेंगे।
हालांकि सूडान की विदेश मंत्री असमा मोहम्मद अब्दुल्लाह ने अल-जज़ीरा से बात करते हुए कहा है कि सोमवार को इस्राईली और सूडानी अधिकारियों के बीच हुई मुलाक़ात के बारे में उन्हें मीडिया के ज़रिए पता चला है और उन्हें इस संबंध में अधिक जानकारी नहीं है।
फ़िलिस्तीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस्राईली और सूडानी अधिकारियों के बीच हुई बैठक की निंदा करते हुए कहा है कि यह क़दम "फ़िलस्तीनियों की पीठ में छुरा घोंपना" है।
फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (पीएलओ) के महासचिव साहब एरीक़ात का कहना था "यह क़दम ऐसे वक़्त में उठाया गया है, जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू, फ़िलिस्तीनियों के मौलिक अधिकारों को ही ख़त्म करने की कोशिश कर रहे हैं।"
ग़ौरतलब है कि ट्रम्प की डील ऑफ़ द सेंचरी ने पैदा होते ही उस समय दम तोड़ दिया, जब अरब और इस्लामी देशों ने एकमत होकर एलान कर दिया कि इस्राईल को मान्यता नहीं दी जाएगी, उसके साथ शांति समझौता नहीं होगा और न ही उसके साथ किसी तरह की वार्ता होगी।
अब ऐसी स्थिति में एक महीने बाद इस्राईल में होने वाले आम चुनावों में अपनी साख बचाने के लिए नेतनयाहू को सूडान जैसे किसी मुस्लिम देश से रिश्ते सामान्य बनाने का एलान करने की ज़रूरत थी।
सूडान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने नेतनयाहू की इस साज़िश से पर्दा उठाते हुए कहा है कि संयुक्त अरब इमारात ने इसके लिए नेतनयाहू की मदद की है और ऐसे संवेदनशील समय में सूडान को इस्राईल के साथ सहयोग के लिए तैयार किया है।
एपी ने नाम ज़ाहर नहीं करने की शर्त पर सैन्य अधिकारी के हवाले से बताया, यूएई ने आश्वासन दिया है कि अगर बुरहान, नेतनयाहू के साथ मुलाक़ात के लिए तैयार हो जाते हैं तो सूडान का नाम आतंकवादी देशों की सूची से निकाल दिया जाएगा।
नेतनयाहू का कहना है कि सूडान के अधिकारी दुनिया में अलग-थलग पड़े अपने देश को दुनिया के नक़्शे पर वापस देखना चाहते हैं और उसका विकास चाहते हैं।
जनवरी 2016 में सूडान के पूर्व विदेश मंत्री इब्राहीम ग़ंदूर ने कहा था कि इस्राईल के साथ रिश्ते सामान्य बनाने से संभव है अमरीका उनके देश पर लगे प्रतिबंध हटा ले।
इस्राईल की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने के सूडान के क़दम से फ़िलिस्तीनी सदमे में हैं और इस्लामी जगत को भी एक बड़ा झटका लगा है। इसलिए कि फ़िलिस्तीनियों ने काफ़ी हद तक ट्रम्प की सेंचरी डील के ख़िलाफ़ अरब और इस्लामी देशों को एकजुट कर लिया था और शनिवार को सूडान समेत अरब लीग के समस्त 22 सदस्यों ने इस डील को ख़ारिज कर दिया था।
अल-फ़तह के महासचिव जिबरईल रजूब ने कहा है कि सूडान ने यह क़दम अपनी जनता की इच्छाओं के विपरीत उठाया है, इसलिए कि सूडानी जनता फ़िलिस्तीनियों के मूल अधिकारों का समर्थन करती है।
हमास के प्रवक्ता हाज़िम क़ासिम ने भी कहा है कि इस्राईल के साथ रिश्ते सामान्य बनाने से उसे अपने अपराधों को जारी रखने और फ़िलिस्तीनियों की ज़मीन हड़पने के लिए हिम्मत मिलेगी।