दो संस्थानों शंघाई इंस्टीट्यूट ऑफ़ मटेरिया मेडिका और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी ने एक अध्ययन किया है, जिसके आधार पर चीन की पारम्परिक चिकिस्ता शैली पर ज़ोर दिया जा रहा है।
हालांकि कुछ लोगों ने तुरंत ही इस सलाह की आलोचना भी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि शिन्हुआ समेत सरकारी मीडिया कोरोना वायरस के ख़तरे से निपटने के लिए सांप जैसे तेल के इस्तेमाल का प्रचार करके एक ख़तरनाक खेल रही हैं।
कहा जा रहा है कि सरकार ने तेज़ी से फैल रहे वायरस से लड़ने के लिए एक सौ पच्चीस पारम्परिक चिकित्सकों को वुहान भेजा है।
केवल चीन ही नहीं, बल्कि पिछले हफ़्ते उसके पड़ोसी देश भारत में एक सरकारी विभाग ने एक बयान जारी करके कोरोना वायरस का मुक़ाबला करने के लिए यूनानी और होम्योपैथिक उपचार शैली पर बल दिया है।
ग़ौरतलब है कि मंगलवार को हांगकांग में कोरोना वायरस से पहली मौत हुई है, जो चीन के बाहर होने वाली दूसरी मौत है। चीन में अब तक इस वायरस से कम से कम 425 लोगों की मौत हो चुकी है।