अमेरिकी रक्षामंत्रालय पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा है कि इराक़ में अमेरिका की ऐनुल असद छावनी पर ईरान ने जो मिसाइल हमला किया था उसमें घायल होने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या में वृद्धि हो रही है।
सीएनएन ने पेंटागन के प्रवक्ता थामस कैंबेल के हवाले से रिपोर्ट दी है कि आठ जनवरी को ईरान ने इराक में स्थित ऐनुल असद छावनी पर जो मिसाइल हमला किया था उसमें 64 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं।
पेंटागन के अधिकारियों ने सीएनएन से वार्ता करते हुए कहा है कि घायल होने वाले सैनिकों की संख्या बदल सकती है। साथ ही इन अधिकारियों ने कहा है कि जिस समय ईरान ने ऐनुल असद छावनी पर मिसाइल हमला किया उस समय लगभग 200 अमेरिकी सैनिक वहां मौजूद थे जबकि दूसरे सूत्रों का कहना है कि वहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों की संख्या इससे भी अधिक थी।
आठ जनवरी को ईरान द्वारा जवाबी हमले के कई घंटे बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सामने आये और उन्होंने कहा कि सब कुछ सही है और इस हमले में न कोई घायल हुआ है न हताहत।
रोचक बात यह है कि उसके कई दिनों के बाद अमेरिकी रक्षामंत्रालय पेंटागन ने कहा कि ऐनुल असद छावनी पर ईरानी हमले में 11 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं जिन्हें उपचार के लिए जर्मनी और कुवैत स्थानांतरित किया गया है और उसके कई दिनों के बाद कहा कि इस हमले में 34 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और अब पेंटागन कह रहा है कि 64 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और यह संख्या बदल भी सकती है।
जानकार हल्कों का कहना है कि ट्रंप ने सबसे पहले यह कहा था कि इस हमले में कोई हताहत या घायल नहीं हुआ है और अब अमेरिकी अधिकारी कबूल कर रहे हैं कि उनके कुछ सैनिक घायल हुए हैं।
इससे साफ- साफ ट्रंप का झूठ सिद्ध होता है क्योंकि ईरान ने 8 जनवरी को जवाबी हमला किया था और जो सैनिक घायल हुए थे वे उसी दिन घायल हुए थे न कि हमले के बाद घायल हो गये।
अमेरिकी अधिकारियों के दावों में एक ध्यान देने वाली बात यह है कि वह धीरे- धीरे सच्चाई कबूल कर रहे हैं, पहले 11 फिर 34 और उसके बाद कह रहे हैं कि 64 सैनिक घायल हुए हैं और साथ ही यह भी कह रहे हैं कि यह संख्या बढ़ भी सकती है। उनकी इस बात से साफ- साफ ज़ाहिर है कि घायल होने वाले सैनिकों की संख्या इससे अधिक है जो बता रहे हैं और कुछ दिनों के बाद घायल सैनिकों की संख्या में वृद्धि कर देंगे।
जानकार हल्कों का कहना है कि अमेरिकी अधिकारियों के दावों में एक रोचक बात यह है कि घायल होने वाले अमेरिकी सैनिकों के दिमाग़ में केवल हल्की चोटें आयीं हैं यानी पूरे शरीर में कहीं चोट नहीं आयी सिर्फ मस्तिष्क में आयी है? इसका जवाब अमेरिकी अधिकारियों से पूछा जाना चाहिये कि ऐसा क्यों है?
इसी प्रकार जानकार हल्कों का कहना है कि अगर अमेरिकी सैनिकों को केवल दिमाग़ में हल्की चोटें लगी हैं तो उन्हें एलाज के लिए कुवैत और जर्मनी ले जाने की क्या ज़रूरत थी? क्या हल्की चोट का उपचार इराक में नहीं हो सकता?
बहरहाल जानकार हल्कों का मानना है कि आठ जनवरी को ईरान ने इराक में अमेरिका की ऐनुल असद छावनी पर जो मिसाइल हमला किया था उसमें काफी बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक हताहत और घायल हुए हैं और अमेरिकी अधिकारी अपनी नाक बचाने के लिए धीरे -धीरे सच्चाई स्वीकार कर रहे हैं और आज नहीं कल पूरी सच्चाई और अमेरिकी अधिकारियों का झूठ सामने आ ही जायेगा।