3 जनवरी को बग़दाद एयरपोर्ट के निकट अमरीका ने हवाई हमला करके आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी, इराक़ के कमांडर अबू अल-मोहंदिस और उनके कई साथियों की हत्या कर दी थी।
ईरान ने जवाबी कार्यवाही करते हुए 8 जनवरी को इराक़ में अमरीका के 2 सैन्य अड्डों पर मिसाइल हमले किए थे और यह एलान किया था कि उसका बदला अभी पूरा नहीं हुआ है।
इराक़ी संसद द्वारा विदेशी सैनिकों को इराक़ से बाहर निकालने का प्रस्ताव पारित कर दिया था और इस देश के स्वयं सेवी बलों ने भी अमरीकी सैनिकों के बाहर निकलने तक अमरीकी हितों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
अमरीकी सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल सुलेमानी की मौत के बाद, क्षेत्र में अमरीकी सैनिकों की जान को जितना ख़तरा है, उतना पिछले 20 वर्षों के दौरान कभी नहीं रहा है।
हिज़्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरुल्लाह ने भी जनरल सुलेमानी की मौत के बाद, चेतावनी देते हुए कहा थाः क्षेत्र में अमरीकी सैन्य अड्डे, समस्त सैनिक और अमरीकी युद्धपोत हमारे निशाने पर होंगे और हमारे पास अमरीका के ख़िलाफ़ संघर्ष करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
इराक़ी स्वयं सेवी बलों के एक कमांडर ने मिडिल ईस्ट आई से बात करते हुए कहा था कि 8 जनवरी को अमरीकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलों की बारिश करके जिस तरह से तेहरान ने वाशिंगटन के गाल पर एक ज़न्नाटे दार तमाचा रसीद किया था, हम इस तरह के तमाचे उनके मुंह पर रसीद करते रहेंगे।
अमरीका के पूर्व सैन्य अधिकारियों का भी यही कहना है कि 8 जनवरी को ईरानी मिसाइल हमलों में हमारे दर्जनों सैनिक घायल हुए हैं, लेकिन हम हमेशा इसी तरह से भाग्यशाली नहीं रहेंगे।
ग़ौरतलब है कि ईरान की जवाबी कार्यवाही के बाद, अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने देश की जनता को धोखे में रखने के लिए कहा था कि सबकुछ ठीक है और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में कोई सैनिक घायल तक नहीं हुआ है।
लेकिन मीडिया में दर्जनों अमरीकी सैनिकों के घायल होने की ख़बरें आने के बाद, पेंटागन ने पहले 11 सैनिकों के घायल होने की बात स्वीकार की थी और अब यह संख्या बढ़ाकर 50 कर दी है।
ईरान और स्वयं सेवी बलों की जवाबी कार्यवाही से अमरीकी इतना घबराए हुए हैं कि वहां की जनता और पूर्व सैन्य अधिकारी ट्रम्प प्रशासन पर मध्यपूर्व से जल्द से जल्द अमरीकी सैनिकों को निकाल लेने के लिए दबाव बना रहे हैं।