रूसी सूत्रों के अनुसार अफगानिस्तान में सोमवार को अमरीका का जो जहाज़ गिरा है उसमें माइकल दि एंड्रा भी थे जिन्हें जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या का योजनाकार बताया गया था।
माइकल दि एंड्रा सीआईए में ईरान, इराक़ और अफगानिस्तान में होने वाले अभियानों के प्रभारी थे और उन्हें सीआई में " आयतुल्लाह माइक " भी कहा जाता था।
वेटर्न्स टूडे के हवाले से तसनीम न्यूज़ एजेन्सी ने बताया है कि रूसी सूत्रों ने बताया है कि जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या के अभियान के प्रमुख माइकल दि एंड्रा की अफगानिस्तान में दुर्घटना का शिकार होने वाले अमरीकी विमान में मौत हो गयी है।
माइकल दि एंड्रा को मध्य पूर्व में अमरीकी योजनाओं को लागू करने वाले मुख्य लोगों में समझा जाता रहा है।
तालिबान ने औपचारिक रूप से एक बयान जारी करके बताया है कि उसने ने अफगानिस्तान के गज़नी प्रांत में अमरीका के एक विमान को मार गिराया है। तालिबान ने जलते हुए विमान का वीडियो भी जारी किया है।
अमरीका ने अफगानिस्तान में अपने विमान के गिरने की खबरों की पुष्टि की है किंतु इस बात की पुष्टि नहीं की है कि उसे मार गिराया गया है।
अमरीका ने यह भी नहीं बताया है कि विमान में कितने लोग सवार थे और कितने लोग मारे गये।
न्यूयार्क टाइम्ज़ ने जून सन 2017 में अपने एक लेख में माइकल दि एंड्रा के बारे में ब्योरा दिया था और लिखा था कि सीआईए ने उन्हें " डार्क प्रिंस" और " आयतुल्लाह माइक" की उपाधि दी थी।
गॉस्पा न्यूज़ के संपादक " फाबियो कारिसो " ने भी ट्वीट किया है कि सीआईए में मिडिल ईस्ट डेस्ट के प्रभारी " आयतुल्लाह माइक" संभावित रूप से अफगानिस्तान में गिरने वाले अमरीकी जहाज़ में मारे गये हैं।
इटली के इस प्रसिद्ध पत्रकार फाबियो कारिसो ने लिखा है कि अफगानिस्तान में गिरने वाला विमान " Bombardier / Northrop Grumman E-11A था। यह विमान, सीआईए के लिए एक प्रकार से मोबाइल मुख्यालय समझा जाता है।
इटली के इस पत्रकार ने बताया है कि यह विमान, सीआईए में ईरान, इराक़ और अफगानिस्तान डेस्क के प्रभारी के पास था और खबरों के अनुसार माइकल दि एंड्रा दुर्घटना के समय विमान में थे ।
सीआईए से निकटता रखने वाले अमरीकी पत्रकारों के अनुसार माइकल दि एंड्रा ने ट्रम्प का आदेश मिलने के बाद, जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या की योजना तैयार की थी।
न्यूयार्क टाइम्ज़ के अनुसार माइकल दि एंड्रा, अलक़ाएदा प्रमुख बिन लादिन के लिए चलाये गये खोजी अभियान के प्रमुख भी रह चुके हैं। इसी प्रकार ड्रोन विमानों द्वारा टारगेट किलिंग के सीआईए के अभियान की ज़िम्मेदारी भी वह उठा चुके हैं।
माइकल दि एंड्रा के व्यक्तिगत जीवन के बारे में किसी को अधिक जानकारी नहीं है। उनका जन्म उत्तरी वर्जीनिया में हुआ था और सीआईए से उनका संबंध दो पीढ़ियों से है।
कहा जाता है कि एक खुफिया अभियान के दौरान एक मुस्लिम महिला से उनका परिचय हुआ और फिर दोनों ने विवाह कर लिया और फिर माइकल दि एंड्रा ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया लेकिन इस्लामी शिक्षाओं की प्रतिबद्धता नहीं करते। इस्लाम धर्म स्वीकार करने के बाद सीआई में उन्हें " आयतुल्लाह माइक" कहा जाने लगा। " आयतुल्लाह " इस्लाम में धर्मगुरुओं की एक उपाधि होती है।
माइकल दि एंड्रा सीआईए के बेहद मशहूर एजेन्ट कहे जाते हैं और कहते हैं कि अलकाएदा को कमज़ोर करने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। इसी प्रकार उनके मातहत काम करने वाले खुफिया एजेन्टों का कहना है कि उन्होंने लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महत्वपूर्ण कमांडर " एमाद मुगनिया" की सन 2008 में हत्या में भी मुख्य भूमिका निभाई।
माइकल दि एंड्रा ने इसी प्रकार दो साल पहले ईरान में होने वाले हंगामों में भी अहम रोल अदा किया था। उस समय अमरीका के तत्कालीन विदेशमंत्री " रेक्स टेलरसन" ने कहा था कि अमरीका ईरान में शांतिपूर्ण रूप से सत्ता परिवर्तन का इरादा रखता है। उनके इस बयान से दोदिन पहले न्यूयार्क टाइम्ज़ ने लिखा था कि ईरान के बारे में ट्रम्प की योजनाओं को लागू करने की ज़िम्मेदारी, सीआई में माइकल दि एंड्रा नाम के एक अधिकारी को दी गयी है।
अमरीकी रहस्मय चुप्पी मामले को और संदिग्ध कर रही है। ईरान में जब युक्रेन का विमान गिरा था तो अमरीका हर क्षण नयी नयी खबरें और दावे मीडिया में कर रहा था लेकिन जब अफगानिस्तान में उसका अपना खोजी विमान गिरा तो अमरीका पर इस बारे में चुप्पी छायी है और अब तक उसने केवल इस दुर्घटना की पुष्टि की है और कोई ब्योरा नहीं दिया है हालांकि मीडिया में यह दावा कई दिनों से किया जा रहा है कि जनरल कासिम सुलैमानी की हत्या के योजनाकार माइकल दि एंड्रा
की अफगानिस्तान में गिरने वाले अमरीकी विमान में मौत हो गयी है। अगर यह खबर सच हुई तो निश्चित रूप से अमरीका के एक बड़ा झटका और जनरल क़ासिम सुलैमानी के समर्थकों के लिए " बड़ी" खबर होगी जो सोशल मीडिया पर इसे अमरीका को लगने वाले दूसरा तंमाचा बता रहे हैं।