28 जनवरी 2020 - 20:10
क्या होगा फिर खैबर पर  यहूदियों का क़ब्ज़ा ?, 1400 साल पहले भगाया था हज़रत अली ने…  बड़ी तेज़ी से बदल रहे हैं हालात...

खैबर एक मशहूर क्षेत्र है जो वर्तमान सऊदी अरब के मदीना नगर से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 1400 पहले इस इलाक़े पर यहूदी समुदाय का क़ब्ज़ा था। इस इलाक़े में एक मज़बूत किला था, यहूदी सैनिक, मदीना के मुसलमानों पर हमला करके इसी क़िले में घुस जाते किंतु सन 628 ईसवी में मुसलमानों और यहूदियों के मध्य " ख़ैबर " नाम का युद्ध हुआ जिसके दौरान हज़रत अली अलैहिस्सलाम की कमान में मुसलमानों ने इस इलाक़े और क़िले पर क़ब्ज़ा कर लिया लेकिन अब इस्राईल इस इलाक़े में यहूदियों को बसाना का इरादा रखता है...

हम यह समझते थे कि सऊदी अरब और अन्य अरब देश ही इस्राईलियों को अपने यहां आने की अनुमति नहीं देते और इस्राईलियों को अनुमति न देने के पीछे वजह अरबों के क्षेत्रों पर उसका क़ब्ज़ा है और यह अरब देश, अरब भूमियों की स्वतंत्रता के लिए शहीद होने वालों के खून के सम्मान में इस्राईलियों के लिए वीज़ा जारी नहीं करते लेकिन अब पता चला है कि इस्राईल के गृहमंत्री ने इस्राईलियों को सऊदी अरब की यात्रा करने की अनुमति दे दी है वह भी व्यापारिक और धार्मिक यात्राओं के लिए। इस फैसले से पता चलता है कि इस्राईल और सऊदी अरब के बीच संबंध अच्छे हो गये हैं।

अब हमें पता चला है कि इस्राईलियों  के सऊदी अरब न जाने की वजह यह थी कि स्वंय इस्राईल को अपने नागरिकों के लिए खतरा महसूस होता था और उसके लगता था कि मक्का व मदीना जैसे शहरों वाले देश में यहूदियों का जाना खतरे से खाली नहीं होगा लेकिन अब लगता है कि इस्राईल को विश्वास हो गया है कि उसके नागरिकों को वहां

ज़ाहिर सी बात है इस्राईल इस तरह का फैसला बिना सऊदी अरब की सहमति के नहीं कर सकता लेकिन इस सिलसिले में कुछ बातें ध्यान योग्य हैं।

पहलीः इस्राईल ने अपने नागरिकों को सऊदी अरब जाने की अनुमति का एलान उस समय किया है जब अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प, द डील आफ सेंचुरी का एलान करने वाले हैं जिसमें इस्राईल और अरबों के बीच संबंध बेहतर बनाने के उपाय सुझाए गये हैं विशेष उन देशों से जिन्होंने बहरैन सम्मेलन में भाग लिया था और खुफिया तौर पर यह स्वीकार किया था कि इस समझौते के लिए 50 अरब डॉलर अदा करेंगे।

दूसरीः इस्राईली के टीवी चैनल नंबर 12 के रिपोर्टर ने सऊदी अरब की यात्रा की और उसे कई सऊदी नगरों का दौरा करने और सऊदी नागरिकों और हस्तियों से इन्टर्व्यू लेने की अनुमति दी गयी और बातचीत लाइव प्रसारित भी की गयी। सऊदी नगरों में मदीना और जद्दा भी शामिल था।

तीसरीः सऊदी अधिकारी, अपने नागरिकों को इस्राईलियों की प्रशंसा करने, इस्राईल की यात्रा करने, इस अवैध शासन से दोस्ती पर गर्व करने और रियाज़ की यात्रा के दौरान इस्राईलियों को अपने घर बुलाने पर प्रोत्साहित कर रहे हैं।

चौथीः सोशल मीडिया पर सऊदी अरब से जुड़ी आईसेल ने फिलिस्तीनियों पर व्यापक रूप से धावा बोलना आरंभ कर दिया है और उन पर तरह तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

पांचवीः प्रतिरोध मोर्चे और इस मोर्चे के सदस्य देशों को बदनाम किया जा रहा है और सऊदी अरब और उससे संबंधित मीडिया में ईरान व सीरिया व हिज़्बुल्लाह के इस्राईल के साथ संबंधों के दावे किये जा रहे हैं और इसके साथ ही सांप्रदायिकता भी फैलायी जा रही है।

छठीः इस्राईल की मांग पर फिलिस्तीनी संघर्ष गुटों विशेष कर हमास को अपराधी घोषित किया गया और इन संगठनों को आतंकवादियों की सूचि में दर्ज कर दिया गया है।

हमें विश्वास है कि सऊदी अरब के मुसलमान, इस प्रकार की नीति को किसी भी दशा में स्वीकार नहीं करेंगे यही हाल सारे अन्य अरब देशों  की जनता का भी है। इन सब के बावजूद सऊदी अरब के विदेश राज्य मंत्री आदिल जुबैर दावा करते हैं कि सऊदी अरब और इस्राईल के बीच कोई संबंध नहीं है। इस्राईलियों की सऊदी यात्रा पर लगा प्रतिबंध खत्म हो चुका है, कैमरों के साथ पर्यटन वीज़ पर इस्राईली सऊदी अरब की यात्रा कर रहे हैं और पैगम्बरे इस्लाम के मज़ार के निकट लाइव कार्यक्रम कर रहे हैं तो अब संबंध किस प्रकार से होगा?

आज इस्राईली रियाज़, जद्दा और मदीना की यात्रा कर रहे हैं, व्यापरियों और पर्यटकों के रूप में और विश्वास करें कल को  वह खैबर की तीर्थ यात्रा करने जाएंगे और आगे चल कर वहां अपना अधिकार जमाने लगेंगे और यहूदी कॉलोनियों का निर्माण शुरु हो जाएगा।

कोई खतरा नहीं है।