23 जनवरी 2020 - 17:45
राष्ट्र संघ के अधिकारियों ने कहा अमेज़न और वाशिंग्टन पोस्ट के मालिक के मोबाइल की जासूसी करवा रहे थे बिन सलमान, एफ़बीआई ने शुरू क

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के लिए अब शायद सुकून से रह पाना संभव नहीं रह गया है। बिन सलमान को लगातार विचलित और चिंतित कर देने वाली ख़बरें मिल रही हैं।

यमन युद्ध में मिलने वाली लगातार विफलताओं और ट्रम्प की ओर से पैसे वसूलने के लिए लगातार डाले जाने वाले दबाव के बीच अब संयुक्त राष्ट्र संघ के दो अधिकारियों ने अपने बयान में कहा है कि अमेज़न वेबसाइट के संस्थापक और विश्व विख्यात अख़बार वाशिंग्टन पोस्ट के मालिक जेफ़ बेज़ोस की टेलीफ़ोन काल की जासूसी में सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के लिप्त होने क संभावना है अतः इस मामले की तत्काल जांच होनी चाहिए।

अमरीकी मीडिया का कहना है कि एफ़बीआई इस मामले की जांच कर रही है जबकि सऊदी अरब का कहना है कि बिन सलमान पर बेबुनियाद आरोप लगाया गया है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के दो अधिकारियों एग्नेस कालामर्ड और डेविड काय के हस्ताक्षर के साथ जारी होने वाले बयान में कहा गया है कि उनके पास इस प्रकार की जानकारियां मौजूद हैं जिनसे ज़ाहिर होता है कि बिन सलमान वाशिंग्टन पोस्ट के मालिक बेज़ोस के मोबाइल फ़ोन से की जाने वाली बातचीत की जासूसी करवा रहे थे। बयान में कहा गया है कि बिन सलमान ने बेज़ोस की फ़ोन काल की जासूसी के लिए जो साफ़्ट वेयर प्रयोग किया है वह इस्राईली है।

इससे पहले भी यह सूचनाएं मीडिया में आ चुकी हैं कि जमाल ख़ाशुक़जी सहित अपने विरोधियों की जासूसी के लिए बिन सलमान ने इस्राईली यंत्र और साफ़्ट वेयर प्रयोग करना शुरू कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि जिन दिनों बिन सलमान ने बेज़ोस की जासूसी करवाई है वह जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के बाद वाले दिन हैं जिससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि बिन सलमान इस क़त्ल में शामिल थे और अपना अपराध छिपाने के लिए वह बेज़ोस की जासूसी कर रहे थे। क्योंकि ख़ाशुक़जी हत्याकांड के मामले में वाशिंग्टन पोस्ट ने बहुत महत्वपूर्ण ख़ुलासे किए थे और लगातार प्रकाशित होने वाली जानकारियों ने बिन सलमान की नींद हराम कर दी थी।

वाल स्ट्रीट जनरल ने तो यहां तक लिखा है कि एफ़बीआई ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। जासूसी के इस साफ़्ट वेयर के निर्माण का काम इस्राईल की एसएनओ कंपनी ने किया है।

डेमोक्रेट सिनेटर क्रिस मर्फ़ी का कहना है कि एफ़बीआई और इंटेलीजेन्स के प्रमुखों को उन्होंने ख़त भेजने का फैसला किया है जिसमें इन संस्थाओं से मांग की जाएगी कि वह बेज़ोस की जासूसी में सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के लिप्त होने के मामले की जांच करें।

टीकाकार कहते हैं कि यह मामला काफ़ी गंभीर है और इससे अमरीका के भीतर सऊदी अरब के लिए समस्याएं काफ़ी बढ़ सकती हैं। यह भी कहा जा रहा है कि सऊदी अरब ने हाल ही में ट्रम्प प्रशासन को 50 करोड़ डालर की जो रक़म अदा की है वह वैसे तो सऊदी अरब में अमरीकी सैनिकों की तैनाती के बदले अदा की है लेकिन वास्तविक मामला यह है कि सऊदी अरब जासूसी के मामले की जांच को रुकवाने की कोशिश में है।