हमें नहीं पता कि वह कौन से सिद्धान्त हैं जिनके आधार पर ट्रम्प ने अपने इराक़ी समकक्ष से भेंट के बाद अमरीका और इराक़ के संबंधों को " सर्वश्रेष्ठ" बताया। यह भेंट दाओस सम्मेलन के अवसर पर हुई। वैसे राष्ट्रपति ट्रम्प एक पेशेवर झूठे होने के साथ ही साथ इराक़ी जनता का बार बार अपमान भी करते हैं। यही वही ट्रम्प हैं जिन्होंने इराक़ की भूमि पर जनरल सुलैमानी, अबू मेहदी अलमुहंदिस और उनके साथियों की हत्या का आदेश दिया था जिस का उदाहरण अतीत में नहीं मिलता। ट्रम्प ने अपने इस आदेश से ढाई करोड़ से अधिक इराक़ियों के गुस्से को भड़का दिया था।
इराक़ी राष्ट्रपति बरहम सालेह की अमरीकी राष्ट्रपति से भेंट गलती थी, खासतौर पर इराक़ की भूमि पर हालिया दिनों में किये गये अमरीकी अपराध के बाद, क्योंकि इराक़ी राष्ट्रपति को , अमरीका द्वारा बनाये गये इराक़ी संविधान के अनुसार, यह अधिकार नहीं है कि वह इराक़ी प्रधानमंत्री की भूमिका अदा करे और किसी भी विदेशी के साथ राजनीतिक मामलों पर चर्चा करें भले ही वह विदेशी, अमरीका का राष्ट्रपति ही क्यों न हो! यही वजह है कि इराक़ और अमरीका के राष्ट्रपति की भेंट का जो लोग विरोध कर रहे हैं उनके पास अपने विरोध की ठोस वजह है।
शायद यहां यह भी याद दिलाना बेहतर होगा कि ट्रम्प ने कई बार जान-बूझ कर इराक़ी सरकार का अपमान किया है और इराक़ी सरकार के मुंह पर तमांचा मारा है। ट्रम्प नये साल का जश्न मानने खामोशी से पश्चिमी इराक़ की एनुलअसद छावनी भी जा चुके हैं लेकिन इस यात्रा के लिए उन्होंने इराक़ी सरकार से अनुमति लेने या उसे सूचना तक देने का कष्ट नहीं किया यहीं नहीं जले पर नमक छिड़कते हुए उन्होंने एनुल असद छावनी पहुंच कर इराक़ प्रधानमंत्री को भेंट के लिए छावनी बुलाया भी मानो वह अमरीका की भूमि में किसी छावनी में हों और मानो इराक़ पर उनका क़ब्ज़ा हो और उसके कोई संप्रभुता ही न हो उस इराक़ कि जिसकी सभ्यता 8 हज़ार साल पुरानी है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने योजना के अतंर्गत, इराक़ी राष्ट्रपति बरहम सालेह से दाओस में भेंट की और फिर पत्रकार सम्मेलन भी किया ताकि यह न लगे कि यह भेंट किसी प्रोटोकोल का हिस्सा थी। हमें तो लगता है कि इस भेंट के पीछे इराक़ के विभाजन की अमरीकी योजना थी क्योंकि अधिकार न रखने वाले राष्ट्रपति से भेंट में इराक़ में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं की जाती इराक़ में संसदीय व्यवस्था है और राष्ट्रपति को इस प्रकार के अधिकार प्राप्त नहीं हैं।
इराक़ी संसद ने स्पष्ट रूप से एक कानून पास करके अमरीका के साथ किसी भी प्रकार के सैन्य सहयोग को अपराध क़रार दे दिया है और इसी प्रकार कानून में स्पष्ट रूप से सारे अमरीकी सैनिकों को देश से निकालने और अमरीका की सभी छावनियों को बंद करने की बात की गयी है। इस लिए इराक़ और अमरीका के राष्ट्रपतियों के मध्य सैन्य सहयोग जारी रखने पर होने वाली हर सहमति संसद में पारित होने वाले कानून का उल्लंघन है।
इराक़ के कुर्द लोग या कम से कम उनके नेता अमरीका द्वारा अपने अपमान से कुछ न सीखने पर आग्रह कर रहे हैं उन्हें इराक के विभाजन के ट्रम्प के षडयंत्र में सहयोग से बचना चाहिए हमें आशा है कि इराक़ी राष्ट्रपति बरहम सालेह का यह क़दम, इराक़ को सांप्रदायिक रुप से टुकड़े करने की षडयंत्र का पहला क़दम नहीं होगा।
इराक़ी जनता, अपने देश में अमरीका की सैन्य उपस्थिति की विरोधी है, और अमरीकी सैनिकों को देश से बाहर निकालने के लिए इराक़ी प्रधानमंत्री के फैसले का समर्थन करती है और अगर अमरीका ने इस मांग को नहीं माना जिसकी संभावना अधिक है तो फिर इराकी प्रतिरोध मोर्चा आगे आएगा और अपना काम शुरु कर देगा जो शायद अभी तक पूरी तरह से शुरु नहीं हुआ है इसी लिए दो दिनों पहले इराक़ में अमरीकी दूतावास की ओर दागे गये दो राकेटों को चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
इराक़ी प्रतिरोध मोर्चे ने अमरीका और उसके जनरल डेविट पेट्रिअस और उनके मित्रों को धूल चटायी है और उन्हें सन 2011 में इराक़ से भागने पर मजबूर कर दिया था और हमें यक़ीन है कि यह इतिहास दोहराया जाएगा और हम इराक में ट्रम्प की हार देखेंगे और शायद उन्हें जिमी कार्टर की तरह अगले चुनाव में ही हार का मुंह देखना पड़े।
हमारी इच्छा है कि राष्ट्रपति बरहम सालेह, इराक़ी प्रतिरोध व संघर्ष के इतिहास को अच्छी तरह से पढ़ेंगे और उस पर ध्यान देंगे। इसी तरह वह अमरीका व इस्राईल के ओर से कुर्दों के अपमान के कड़वे अनुभव से भी कुछ सीखेंगे तो शायद उन्हें यह पता चल जाएगा कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प से मिल कर उन्होंने कितनी बड़ी गलती की है।
नये और वास्तविक इराक़, अमरीकी छावनियों के मल्बे पर खड़ा होगा और अपनी पहले वाली ताकत हासिल करके रहेगा और जो इसके विपरीत सोचता है वह या तो इराक़ी जनता को नहीं पहचानता या फिर अमरीका और उसकी हार से अवगत नहीं है।Q.A. साभार, रायुल यौम, लंदन