AhlolBayt News Agency (ABNA)

source : ابنا
मंगलवार

13 फ़रवरी 2024

6:48:11 am
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वैज्ञानिक और बुनियादी ढांचे को नष्ट और बुद्धिजीवियों को चुन चुन का मार रहा है इस्राईल

ज़ायोनी सेना ने 100 से अधिक डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों को मार डाला है, जिसमें इस्लामिक विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रोफेसर सुफ़ियान ताई भी शामिल हैं, जो दुनिया के शीर्ष दस वैज्ञानिक हस्तियों में से एक थे।


ग़ज़्ज़ा में 7 अक्टूबर से ही जनसंहार कर रहा इस्राईल जहाँ भयानक क़त्ले आम के बीच लूट खसोट में लगा है वहीँ अल अखबार ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा है कि इस्राईल ग़ज़्ज़ा के वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के साथ साथ बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों और कुलीन वर्ग को चुन चुन का मार रहा है।

अल-अखबर ने ग़ज़्ज़ा के बारे में एक लेख में लिखा कि ग़ज़्ज़ा में विश्वविद्यालयों और शिक्षा केंद्रों से प्राप्त नवीनतम जानकारी से पता चला है कि ज़ायोनी टैंक दो सप्ताह पहले आगे बढ़े और बड़ी संख्या में इमारतों को नष्ट कर दिया। इस प्रकार अल-अक्सा स्टेट यूनिवर्सिटी और ग़ज़्ज़ा के उत्तर में 90% से अधिक उच्च शिक्षा संस्थान नष्ट हो गए हैं।

ग़ज़्ज़ा में यूनिवर्सिटी स्क्वायर को ग़ज़्ज़ा के सबसे व्यस्त क्षेत्रों में से एक माना जाता है और आमतौर पर यह क्षेत्र उच्च शिक्षा संस्थानों का केंद्र है। इसमें इस्लामिक विश्वविद्यालय, अल-अक्सा सरकारी विश्वविद्यालय और अल-अजहर विश्वविद्यालय सहित 3 प्रमुख ऐतिहासिक विश्वविद्यालय शामिल हैं।

इसी तरह, शिक्षा मंत्रालय का केंद्रीय कार्यालय, दर्जनों स्कूल, बड़े पुस्तकालय, प्रिंटिंग हाउस और शैक्षिक और अनुसंधान केंद्र भी इसी क्षेत्र में स्थित हैं जो सीधे तौर पर ज़ायोनी आक्रमण के निशाने पर हैं।

अतिक्रमणकारी ज़ायोनी सेना ने इन शैक्षणिक केंद्रों और विश्वविद्यालयों के एक हिस्से पर बुलडोज़र चला दिया जबकि दूसरे हिस्से पर बमबारी की।

ग़ज़्ज़ा की इस्लामिक यूनिवर्सिटी, जहां 20,000 छात्र पढ़ रहे थे, पर अतिक्रमणकारी ज़ायोनी सेना ने सीधे बमबारी की और इसके कई हिस्से नष्ट हो गए। इन सबके बीच, अल-अक्सा विश्वविद्यालय एकमात्र विश्वविद्यालय था जो बमबारी से बच गया था, लेकिन क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, ज़ायोनी हमलावरों ने इस विश्वविद्यालय को भी विस्फोटकों से उड़ा दिया।

विश्वविद्यालय भवनों और उपकरणों को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया गया और ज़ायोनी सेना ने जानबूझकर विश्वविद्यालय पर बमबारी की और जो कुछ बचा था उसे नष्ट करने या चोरी करने के लिए इमारतों के अंदर अपने आतंकवादी समूहों को भेज दिया।

गौरतलब है कि अतिक्रमणकारी ज़ायोनी सेना की आक्रामकता से ग़ज़्ज़ा के शैक्षणिक और वैज्ञानिक संस्थानों को हुई भौतिक क्षति के अलावा, दुश्मन ने ग़ज़्ज़ा की प्रभावशाली वैज्ञानिक हस्तियों को भी निशाना बनाया।

युद्ध की शुरुआत के बाद से, ज़ायोनी सेना ने 100 से अधिक डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों को मार डाला है, जिसमें इस्लामिक विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रोफेसर सुफ़ियान ताई भी शामिल हैं, जो दुनिया के शीर्ष दस वैज्ञानिक हस्तियों में से एक थे।

यूरो-मेडिटेरेनियन ह्यूमन राइट्स वॉच द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, ज़ायोनी सेना ने ग़ज़्ज़ा पट्टी में अकादमिक और वैज्ञानिक हस्तियों के खिलाफ जानबूझकर हमले किए हैं और बिना पूर्व चेतावनी के उनके घरों को निशाना बनाया है। ज़ायोनी सेना के हमलों में यह लोग अपने परिवार समेत मारे गए या मलबे में दब गए। इस बयान में ज़ायोनी सेना के सीधे हमलों के दौरान 17 प्रोफेसर, 59 वैज्ञानिक शहीद हो गए जो क्षेत्र की प्रमुख वैज्ञानिक शख्सियतों के रूप में जाने जाते थे।