• मोमिन आपस में भाई- भाई हैं तो अपने दो भाइयों के मध्य सुलह करा दो!+ फ़ोटो,

    इस्लामी देशों के पास अपार संसाधन हैं। विश्व के कुल उर्जा स्रोतों का 70 प्रतिशत भाग मुसलमानों के पास है। इसी प्रकार दुनिया के लगभग 65 प्रतिशत प्राकृतिक स्रोत मुसलमानों के पास हैं। महान ईश्वर पवित्र कुरआन के सूरये हुजुरात में कहता है कि मोमिन आपस में भाई- भाई हैं तो अपने दो भाइयों के मध्य सुलह करा दो और ईश्वर से डरो ताकि उसकी दया के पात्र बनो"ईरान की इस्लामी व्यवस्था के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह का मानना था कि मुसलमानों के मध्य एकता इस्लामी जगत के विकास का कारण है। स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह का मानना था कि मुसलमानों के विभिन्न संप्रदायों के मध्य एकता से मुसलमानों के मज़बूत होने और इस्लामी जगत से जुड़ी समस्याओं के समाधान का रास्ता निकल सकता है। 11 फरवरी वर्ष 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति के सफ़ल हो जाने के बाद दुश्मनों की गतिविधियां और तेज़ हो गईं और उन्होंने ईरानी राष्ट्र के मध्य फूट डालने और उसे कमज़ोर करने के लिए विभिन्न प्रकार का षडयंत्र रचना आरंभ कर दिया। दुश्मनों और षडयंत्रकारियों ने जातीय और धार्मिक मतभेदों को फैलाकर इस्लामी क्रांति को उसके मूल मार्ग से हटाने का बहुत कुप्रयास किया। शीया मुसलमानों का मानना है कि 17 रबीउल अव्वल को पैग़म्बरे इस्लाम का जन्म हुआ था जबकि सुन्नी मुसलमानों का मानना है कि 12 रबीउल अव्वल को पैग़म्बरे इस्लाम का जन्म हुआ था। 12 से 17 रबीउल अव्वल के समय को स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने एकता सप्ताह का नाम दिया। उनका यह क़दम मुसलमानों के मध्य फूट डालने के शत्रुओं के षडयंत्रों के मार्ग की बहुत बड़ी रुकावट बन गया। 28 नवंबर वर्ष 1981 को स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी की ओर से एकता सप्ताह की घोषणा की गयी थी। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने 32वीं इस्लामी एकता कान्फ़्रेन्स में अपने भाषण में कहा कि हमें हर हाल में एकजुट होना होगाइमाम ख़ुमैनी का कहना था कि ईश्वर की कृपा से ईरान में दोनों संप्रदायों के मध्य कोई मतभेद नहीं है और सब आपस में भाईचारे के साथ घुल मिलकर रहते हैं। इस्लामी देश में रहने वाले अहले सुन्नत भाइयों को जान लेना चाहिये कि बड़ी शैतानी शक्तियों से संबंधित एजेन्ट इस्लाम और मुसलमानों का भला नहीं चाहते हैं और उनसे मुसलमानों का दूर रहना ज़रूरी है और फूट डालने वाले उनके कुप्रचारों पर ध्यान नहीं देना चाहिये। मैं पूरी दुनिया के मुसलमानों की ओर बंधुत्व का हाथ बढ़ाता हूं।“ यहां इस बात का जानना रोचक होगा कि शीया और सुन्नी मुसलमानों के मध्य बहुत अधिक धार्मिक समानताएं मौजूद हैं। दोनों का ईश्वर एक, पैग़म्बर एक, कुरआन एक, क़िबला एक और इसी तरह प्रलय जैसी बहुत सी धार्मिक बातों के संबंध में दोनों की आस्थायें समान हैं। यहां तक कि अधिकांश सुन्नी मुसलमान हज़रत अली अलैहिस्सलाम को मानते और उनके प्रति श्रद्धा रखते हैं यानी हज़रत अली अलैहिस्सलाम की महानता के बारे में शीया- सुन्नी मुसलमानों की आस्था समान है। यही नहीं अहले सुन्नत की महान हस्तियों और प्रसिद्ध शायरों ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम को विशेष श्रद्धा व सम्मान के साथ याद किया है। खेद के साथ कहना पड़ता है कि आज सऊदी अरब जैसे कुछ इस्लामी देशों के इस्लामी जगत के सबसे बड़े व घोर शत्रु अमेरिका और इस्राईल से बहुत अच्छे संबंध हैं जबकि सऊदी अरब स्वयं को मक्का और मदीना का सेवक भी कहता है। दूसरे शब्दों में सऊदी अरब क्षेत्र में अमेरिका और इस्राईली नीतियों का संचालक बन गया है जबकि अगर मुसलमान एकजुट होते तो उनकी सहकारिता, सहयोग व समरसता से इस्लामी जगत के सबसे महत्वपूर्ण फिलिस्तीन मुद्दे का बहुत आराम से समाधान किया जा सकता था। इस्लामी देशों के पास अपार संसाधन हैं। विश्व के कुल उर्जा स्रोतों का 70 प्रतिशत भाग मुसलमानों के पास है। इसी प्रकार दुनिया के लगभग 65 प्रतिशत प्राकृतिक स्रोत मुसलमानों के पास हैं। इस समय मध्यपूर्व दुनिया के महत्वपूर्ण एवं स्ट्रैटेजिक क्षेत्रों में से है और वर्चस्ववादी शक्तियां सदैव इस क्षेत्र पर वर्चस्व जमाने की कोशिश में रहती हैं। ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई भी स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी की भांति एकता को इस्लामी जगत की सबसे महत्वपूर्ण ज़रूरत समझते हैं और इस्लामी संप्रदायों को संबोधित करते हुए कहते हैं दुश्मन हम सबको एक दूसरे की नज़र में बुरा दिखाते हैं, हम सबको एक दूसरे की दृष्टि में अनुचित दिखाते हैं यह दुश्मनों का काम है।

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  • इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चेहलुम के अवसर पर इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में शोक सभा का आयोजन

    इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चेहलुम के अवसर पर इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में शोक सभा का आयोजन

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  • ईरान अपने शहीदों को कैसे याद रखता है, देखिए तस्वीरों में

    इस्लामी गणतंत्र ईरान की सरकार और जनता अपने शहीदों को विशेष सम्मान देते हैं और उन्हें हमेशा याद रखते हैं। ईरान में जगह जगह शहीदों की तस्वीरें देखने को मिल जायेंगी। ईरान में हज़ारों सड़कों, राजमार्गों, इमारतों, पार्कों, स्कूलों के नाम शहीदों के नाम पर मिल जायेंगे। इन शहीदों में ईरान पर सद्दाम द्वारा थोपे गए 8 वर्षीय युद्ध और सीरिया में हज़रत ज़ैनब (स) के रौज़े की रक्षा करते हुए आतंकवादी गुटों के हाथों शहीद होने वाले जांबाज़ शामिल हैं। ईरान की अधिकांश आबादी शिया मुस्लिम है, जो 1400 वर्ष कर्बला में शहीद होने वाले इमाम हुसैन (अ) और उनके 72 साथियों से विशेष श्रद्धा रखती है। ईरानी क़ौम ने ज़ुल्म के सामने कभी घुटने नहीं टेकने और प्रतिरोध करते हुए शहीद होने का जज़्बा इमाम हुसैन (अ) से ही सीखा है। इसी जज़्बे के तहत ज़रूरत पड़ने पर युवकों से लेकर बूढ़े तक मोर्चा संभाल लेते हैं और अपनी सबसे मूल्यवान चीज़ जान की क़ुर्बानी पेश कर देते हैं। इतिहास साक्षी है कि कोई भी क़ौम जो अपने धर्म, अपने राष्ट्र और अपने सम्मान की रक्षा के लिए जान की क़ुर्बानी देने से नहीं डरती, उसे दुनिया की कोई ताक़त न ही पराजित कर सकती है और न ही मिटा सकती है। इस्लाम, मुसलमानों को शहादत अर्थात मौत को गले लगाकर हमेशा के लिए अमर हो जाने का पाठ पढ़ाता है, जिसके कारण इस्लाम के अनुयाई हमेशा एक ज़िंदा क़ौम के रूप में पहचाने जाते हैं।

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  • ईरान में पवित्र कुरान का सबसे बड़ा प्रिंटिंग प्रेस

    ओसवा प्रिंटिंग हाउस ईरान में पवित्र कुरान का सबसे बड़ा प्रिंटिंग प्रेस और इस्लामी दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा प्रिंटिंग प्रेस है। यह ईरान और विदेशों के इस्लामिक समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए पवित्र कुरान को व्यापक और बड़े पैमाने पर प्रकाशित करने के उद्देश्य से बनाया गया है और सुसज्जित है। मुद्रण और प्रकाशन कंपनी ओस्वा की स्थापना देश की अवक़ाफ़ पूंजी के साथ की गई है और अब तक पवित्र कुरान प्रकाशन के अलावा, दर्जनों धार्मिक पुस्तकों भी प्रकाशित और मुद्रण की गई हैं।

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  • Quds Day

    भारत के मुस्लिम लोगों ने रमजान के आखिरी शुक्रवार को इस देश के कोने कोने में विश्व व्यापी क़ुद्स दिवस समारोह आयोजित करके दुनिया के अहंकारों, ग़ासिबों और उत्पीड़न के खिलाफ मार्च किया।

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  • कर्बला में अमीरुल-मोमनीन (अ.स) की शहादत की रात

    करबला में हज़रत अब्बास (अ.सस.) के पवित्र हरम रविवार शाम को, बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों का गवाह रहा जो इस नूरानी बारगाह में इमाम अली (अ.) की शहादत की रात और क़द्र रातों की दूसरी रात में उपस्थित हुए।

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  • दुश्मन कोई मूर्खता नहीं कर सकताः वरिष्ठ नेता + फ़ोटो

    इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस्लामी व्यवस्था को बेहतरीन स्थिति में और साम्राज्यवादियों और उनके अगुवा अमरीका के मोर्च को सबसे कमज़ोर स्थिति में क़रार दिया

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  • ईरान एक सुंदर और नवीन सभ्यता वाला देश है: भारतीय पर्यटक प्रो. चौधरी

    भारत की विश्व प्रसिद्ध पर्ल एकेडमी के एक अधिकारी ने जो हाल ही में ईरान आए थे अपनी इस यात्रा के बारे में वह कहते हैं कि “ईरान एक सुंदर और नवीन सभ्यता वाला देश है, ईरान की जनता के दिलों में बहुत अधिक प्रेम पाया जाता है।”

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  • फ़िलिस्तीनी संगठन हमास का 31 साल का सफ़र, पत्थरों से लड़ाई मिसाइल और ड्रोन हमलों तक कैसे पहुंची?!

    फ़िलिस्तीन के हमास आंदोलन की स्थापना 1987 में हुई और उसी समय से यह संगठन फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की रक्षा और फ़िलिस्तीनियों के छिने अधिकारी की वापसी के लिए संघर्षरत है।

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  • चेहलुम, अहलेबैत वर्ल्ड एसेम्बली द्वारा बच्चों के लिए कैंम्प का आयोजन।

    इराक़, इमाम हुसैन अलै. के चेहलुम की याद में हर साल करोड़ों लोग नजफ़ से कर्बला तक पैदल जाकर जनाबे ज़ैनब स. की याद को जिंदा करते हैं इस अमन और शांति मार्च में जगह जगह कैम्प लगा कर लोग ज़ाएरीन की सेवा करते हैं इसी रास्ते में अहलेबैत वर्ल्ड एसेम्बली ने भी कई कैम्प तगाए हैं जिसमें बच्चों के लिए भी एक कैम्प है जहाँ उन्हें एनीमेशन दिखाए जा रहे हैं और इमाम हुसैन अ. के बारे में बताया जा रहा है।

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  • कर्बला की ओर बढ़ रहे हैं तीर्थ यात्रियों के कारवां, श्रद्धा में डूबा हुआ है पूरा वातावरण

    दुनिया भर से पैग़म्बरे इस्लाम और उनके परिजनों के श्रद्धालु इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का चेहलुम मनाने के लिए कर्बला की ओर बढ़ रहे हैं।

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  • यौमे अली असग़र

    दुनिया के अलग अलग शरहों में कर्बला के सबसे छोटे 6 महीने के शहीद की याद मनायी गयी।

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