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फ़िलिस्तीनी में जिंदा जलाए गए बच्चे का बाप भी चल बसा।

  • News Code : 704892
  • Source : एरिब.आई आर
Brief

अतिग्रहित पश्चिमी तट में बसाए गए ज़ायोनियों द्वारा अभी हाल में फ़िलिस्तीनियों के घरों पर पेट्रोल बम के हमले में, घर में ज़िन्दा जल कर मरने वाले 18 महीने के फ़िलिस्तीनी बच्चे का बाप भी, घाव बर्दाश्त न कर पाने के कारण इस दुनिया से चल बसा।

अतिग्रहित पश्चिमी तट में बसाए गए ज़ायोनियों द्वारा अभी हाल में फ़िलिस्तीनियों के घरों पर पेट्रोल बम के हमले में, घर में ज़िन्दा जल कर मरने वाले 18 महीने के फ़िलिस्तीनी बच्चे का बाप भी, घाव बर्दाश्त न कर पाने के कारण इस दुनिया से चल बसा।
18 महीने के अली दवाब्शा के बाप सअद दवाब्शा ज़ायोनी शासन के अतिग्रहण वाले बेरशैबा शहर में सोरोका मेडिकल सेंटर में शनिवार तड़के इस दुनिया से चल बसे। वे बसाए गए ज़ायोनियों के हमले में 80 फ़ीसद जल गए थे। उनकी बीवी रिहाम और 4 साल का एक अन्य बेटा अहमद दवाब्शा भी अस्पताल में गंभीर हालत में हैं।
ज्ञात रहे कि 31 जुलाई को अतिग्रहित पश्चिमी तट के नाबलुस शहर से 25 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित दूमा क़स्बे में ज़ायोनियों ने फ़िलिस्तीनियों के घरों पर पेट्रोल बम से हमला किया था।  इस हमले में एक फ़िलिस्तीनी के घर में आग लग गई। इस घटना में 18 महीने का फ़िलिस्तीनी बच्चा अली दवाब्शा ज़िन्दा जलकर मर गया था। इस घटना पर न सिर्फ़ फ़िलिस्तीनियों के राजनैतिक और प्रतिरोधक गुटों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई बल्कि संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव, यूरोपीय संघ की विदेश नीति मामलों की प्रभारी, जर्मनी, ईरान, अमरीका और स्पेन सहित दुनिया के अनेक देशों ने इस घटना की निंदा की थी।
इस घटना को संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने आतंकी कृत्य कहा था और अपराधियों को क़ानून के कटहरे में खड़ा करने की मांग की थी। बान की मून के प्रवक्ता स्टीफ़न डुजैरिक ने एक बयान में कहा, “बसाए जाने वाले यहूदियों के लगातार हिंसक व्यवहार पर उन्हें दंडित न किया जाना दूसरे जघन्य अपराध का कारण बना जिसमें एक निर्दोष की मौत भी शामिल है।”
यूरोपीय संघ के विदेश नीति मामलों की प्रभारी फ़ेडरिका मोगेरिनी की प्रवक्ता की ओर से 31 जुलाई को जारी किए गए बयान में आया है, “इस्राइली अधिकारियों को स्थानीय आबादी की रक्षा के लिए ठोस उपाय करना चाहिए। हम बसाए जाने वालों को हिंसक व्यवहार के लिए कड़ी सज़ा देने, क़ानून को पूरी तरह लागू करने और पूरी जवाबदेही की मांग करते हैं।”


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