इस्राईल जेलों में फ़िलिस्तीनी क़ैदियों को जबरन खाना खिलाने का क़ानून।

  • News Code : 703421
  • Source : एरिब.आई आर
Brief

इस्राईली जेलों में भूख हड़ताल करने वाले फिलिस्तीनी क़ैदियों को गुवांतानामो शैली में ज़बरदस्ती खाना खिलाने के इस्राईली क़ानून की फ़िलिस्तीनियों ने कड़ी निंदा की है।

इस्राईली जेलों में भूख हड़ताल करने वाले फिलिस्तीनी क़ैदियों को गुवांतानामो शैली में ज़बरदस्ती खाना खिलाने के इस्राईली क़ानून की फ़िलिस्तीनियों ने कड़ी निंदा की है।
गुरुवार को इस्राईली संसद ने क़ैदियों को खाने के लिए मजबूर करने वाले विवादित क़ानून को पारित कर दिया। इस्राईल के इस क़दम की व्यापक पैमाने पर कड़ी आलोचना हो रही है और इसे क़ैदियों की आवाज़ दबाने के लिए एक प्रकार की यातना क़रार दिया जा रहा है।
इस अवसर पर जीवन के 16 क़ीमती वर्ष इस्राईली जेलों में बिताने वाले 70 वर्षीय फ़िलिस्तीनी नागरिक मूसा अबू-बक्र ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा, इस्राईली जेल में क़ैदियों को किसी भी प्रकार के मानवाधिकार न दिए जाने और भयानक यातनाओं के ख़िलाफ़ जब मैंने भूख हड़ताल शुरू की तो दो सप्ताह पूरे होने पर मुझे ज़बरदस्ती खाना खिलाने का प्रयास किया गया। ज़बरदस्ती खाना खिलाने की प्रक्रिया बहुत ही दुखदायी होती है और वह तकलीफ़ मैं आज तक नहीं भूला हूं। इस प्रक्रिया में नाक और मूंह से एक पाइप डाला जाता है, जिससे बहुत तकलीफ़ होती है।
उल्लेखनीय है कि 1980 के दशक में इस्राईली जेलों में क़ैद भूख हड़ताल करने वाले फ़िलिस्तीनी क़ैदियों को इसी प्रकार खाने पर मजबूर किया जाता था। मानवाधिकार संगठनों की ओर से कड़ी निंदा के बाद ज़ायोनी शासन ने इस पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब पुनः ज़ायोनी संसद ने इस क़ानून को पारित कर दिया है। क़ैदियों के मामलों के फ़िलिस्तीनी मंत्री ईसा क़राक़े ने गुरुवार को इस्राईल के इस क़ानून की कड़ी निंदा करते हुए कहा, यह हत्या को वैध करने के समान है और यह एक बहुत ही ख़तरनाक मिसाल पेश करेगा।  
उन्होंने कहा कि जबरन खाना खिलाना एक अनैतिक यातना है, जो क़ैदियों की मौत का कारण भी बन सकती है।क़राक़े का कहना था कि यह एक प्रकार से भूख हड़ताल करने वाले क़ैदी को फांसी के तख़्ते पर चढ़ाना है।


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