पाकिस्तानी मुल्ला ने स्कूल हत्याकांड की आलोचना से किया इंकार।

  • News Code : 659415
  • Source : एरिब.आई आर
Brief

पाकिस्तान की राजधानी में लाल मस्जिद के बाहर शुक्रवार को सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों के विरोध प्रदर्शन किया जिसके बाद पैदा होने वाले तनाव के अंतर्गत पुलिस की भारी टुकड़ी ने क्षेत्र को घेरे में ले लिया ।

पाकिस्तान की राजधानी में लाल मस्जिद के बाहर शुक्रवार को सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों के विरोध प्रदर्शन किया  जिसके बाद पैदा होने वाले तनाव के अंतर्गत पुलिस की भारी टुकड़ी ने  क्षेत्र को घेरे में ले लिया ।
पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार शुक्रवार  महिलाओं सहित सिविल सोसायटी के कई सदस्यों को पुलिस  ने गिरफ्तार भी किया।
सिविल सोसायटी के प्रदर्शन का उद्देश्य लाल मस्जिद के संचालक मौलाना अब्दुल अजीज के उस बयान का विरोध है, जिसमें उन्होंने पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल में मासूम बच्चों के नरसंहार की निंदा करने से इनकार कर दिया था।
मौलाना अब्दुलअज़ीज़ ने पेशावर में स्कूली बच्चों की निर्दयता से हत्या की घटना की आलोचना से इन्कार करते हुए कहा कि एक घटना की आलोचना और दूसरी पर खामोशी सही नहीं है। पाकिस्तान में कुछ चरमपंथी धर्मगुरु और हल्क़े, पेशावर हमले की अमानवीय घटना को, प्रतिक्रिया करार देते हुए यह कह रहे हैं कि उन घटनाओं की रोक जरूरी है जिनके कारण इस प्रकार के आतंकवादी आक्रमण होते हैं।
मौलाना अब्दुलअज़ीज़ इस्लामाबाद की उस लाल मस्जिद के संचालक हैं जो पहली बार अक्तूबर दो हजार एक में अफगानिस्तान पर हमले के बाद तालिबान के समर्थन में जुलूस निकलने के बाद प्रसिद्ध हुई।
फिर इस मस्जिद के अंतर्गत धार्मिक स्कूलों के छात्रों और छात्राओं ने आस पास उत्पात मचाना आरंभ कर दिया और उन्हें लठबाज़ी और अनेक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाने लगी और कई लोगों को छात्रों ने बंधक बनाया।
23 जून 2007 को लाल मस्जिद और जामिया हफ्साह के छात्र-छात्राओं ने कुछ चीनियों को भी अपहरण किया। उन पर आरोप लगाया कि वह अश्लीलता फैलाते थे। जूलाई 2007 में सरकारी रेंजरों और पुलिस ने लाल मस्जिद और जामिया हफ्सा को घेरे में लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी जिसमें दर्जनों मारे गए और न जाने कितने घायल हुए।  
लाल मस्जिद के खिलाफ कार्यवाही में इस के मुख्य संचालक अब्दुर्रशीद गाज़ी मारे गये जबकि उनके भाई  अब्दुल अज़ीज बुर्के में भागते हुए पकड़े गए। वह बुर्का पहनकर लाल मस्जिद से बाहर जाने वाली छात्राओं के झुरमुट में औरतों के कपड़े पहन कर भागने की कोशिश कर रहे थे।
अब्दुल अज़ीज़ के बुर्के में महिलाओं की तरह भागने से उनके अनुयाइयों को भारी  निराशा हुई जिन्हें वह  हर हाल में शहीद होने की सिफारिश करते थे। मौलाना अब्दुल अज़ीज़ ने अपनी सफाई देते हुए कहा थ कि इस्लाम में अपनी जान बचाना ज़रूरी है इसलिए मैं अपनी जान बचाई।
मगर बाद में एक अलग बयान में उन्होंने कहा कि वास्तव में वह बैतुल्लाह महसूद से मिलने के लिए बुर्के का सहारा लेकर जा रहे थे।
मौलाना अब्दुल अज़ीज़ ने दावा किया है कि पैगम्बरे इस्लाम (स )ने उनके सपने में  तीन सौ बार जिहाद का आदेश दिया।
यही अब्दुल अज़ीज़ आज पेशावर में बेगुनाह बच्चों की हत्या की आलोचना पर तैयार नहीं है। 


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