रोहिंग्या मुसलमानों की हालत पर ध्यान दिए जाने की मांग।

  • News Code : 803351
  • Source : तेहरान रेडियो
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म्यांमार के विभिन्न क्षेत्रों में रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध बौद्ध धर्म के मानने वाले अतिवादियों के अपराध यथावत जारी हैं और मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वालों ने भी आंखे मूंद रखी है

म्यांमार के मुसलमानों के विरुद्ध हिंसात्मक कार्यवाहियां जारी हैं
म्यांमार के विभिन्न क्षेत्रों में रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध बौद्ध धर्म के मानने वाले अतिवादियों के अपराध यथावत जारी हैं और मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वालों ने भी आंखे मूंद रखी है ऐसी स्थिति में ईरान के विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ ने राष्ट्रसंघ के नये महासविच अन्टोनियो गुटेरस को एक पत्र लिखकर म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की दुर्दशा पर गम्भीर रूप से ध्यान दिये जाने की मांग की है।
विदेशमंत्री ने इस पत्र में म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की दुर्दशा पर गहरी चिंता जताने के साथ स्पष्ट किया है कि म्यांमार की सरकार को यह बताया जाये कि इन मुसलमानों के अधिकारों के हनन को रोका जाये और मानवताप्रेमी सहायताओं तक तुरंत उनकी पहुंच को सरल बनाया जाना चाहिये।
राष्ट्रसंघ के नये महासचिव के नाम लिखे पत्र में आया है कि रोहिंग्या मुसलमान अपने मौलिक अधिकारों से वंचित हैं यानी उनके पास एसी सरकार नहीं है जो उनके अधिकारों का समर्थन करे और इसके अलावा प्रतिदिन उन्हें हिंसात्मक कार्यवाहियों का सामना है और उनमें बहुत से बेघर हो चुके हैं।
विदेशमंत्री के पत्र में आया है कि रोहिंग्या मुसलमानों की दुर्दशा ने विश्व समुदाय और इस्लामी जगत में भी गहरी चिंता उत्पन्न कर दी है।
विदेशमंत्री के पत्र में रोहिंग्या मुसलमानों की हालत पर गम्भीर रूप से ध्यान दिये जाने की मांग राष्ट्रसंघ के महासचिव से एसी स्थिति में की गयी है जब इस संघ ने रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध बौद्धधर्म के मानने वाले अतिवादियों के अपराधों की केवल भर्त्सना की है और रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध अपराधों को रोकवाने के लिए कोई गम्भीर कार्यवाही नहीं की है जबकि राष्ट्रसंघ के घोषणापत्र के अनुसार इस संघ का मूल दायित्व विश्व में शांति व सुरक्षा स्थापित करने में सहायता करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों के हनन को रोकना है।
यद्यपि इस संघ ने घोषणा की है कि वह शीघ्र ही अपना एक दूत म्यांमार भेजेगा ताकि रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा में वृद्धि की जांच करे परंतु म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति पर ध्यान देना, उनकी हत्या को रोकने के लिए कार्यवाही करना और राष्ट्रसंघ के दायित्वों का संचालन राष्ट्रसंघ के नये महासचिव की परीक्षा है।


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