हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनईः

चुनाव में जनता की भागीदारी से ईरान और व्यवस्था का सम्मान बढ़ेगा।

  • News Code : 734018
  • Source : एरिब.आई आर
Brief

वरिष्ठ नेता ने कहा है कि 26 फ़रवरी के चुनाव में जनता के सभी वर्गों की भागीदारी से इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था का सम्मान बढ़ेगा

वरिष्ठ नेता ने कहा है कि 26 फ़रवरी के चुनाव में जनता के सभी वर्गों की भागीदारी से इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था का सम्मान बढ़ेगा
26 फरवरी को ईरान में संसद और वरिष्ठ नेता का चयन करने वाली विशेषज्ञ परिषद का चुनाव होगा।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई से सोमवार को तेहरान में ईरान की वायुसेना के कमान्डरों व कर्मचारियों ने भेंट की। यह भेंट, 8 फ़रवरी 1979 को ईरानी वायुसेना द्वारा इमाम ख़ुमैनी का आज्ञापालन करने का एलान किए जाने की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हुई। इस असवर पर वरिष्ठ नेता ने बल दिया कि “चुनाव में सबके भाग लेने से ईरान और व्यवस्था का सम्मान बढ़ेगा और उसका बीमा होगा।”
वरिष्ठ नेता ने चुनाव को ऐसा कर्तव्य बताया जिसमें सबको भाग लेना चाहिए। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि देश को आर्थिक क्षेत्र में मज़बूत बनाना मूल विषयों में शामिल है ताकि दुश्मन आर्थिक मार्ग से अपनी इच्छा न थोप सके।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्लामी क्रान्ति के शुरु से अब तक, भौतिकवाद की समर्थक सभी सरकारें इस्लामी व्यवस्था के ख़िलाफ़ थीं किन्तु वे कुछ बिगाड़ न सकीं। उन्होंने अर्थव्यवस्था व संस्कृति को नुक़सान पहुंचाने के दुश्मन के षड्यंत्र के संबंध में जनता में जागरुकता पर बल दिया और कहा कि दुश्मन की ओर से लापरवाही अच्छी चीज़ नहीं है क्योंकि दुश्मन जब दुश्मनी के ज़रिए कुछ नहीं बिगाड़ पाता तो वह दोस्ती के भेस में नुक़सान पहुंचाता है।

26 फरवरी को ईरान में संसद और वरिष्ठ नेता का चयन करने वाली विशेषज्ञ परिषद का चुनाव होगा।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई से सोमवार को तेहरान में ईरान की वायुसेना के कमान्डरों व कर्मचारियों ने भेंट की। यह भेंट, 8 फ़रवरी 1979 को ईरानी वायुसेना द्वारा इमाम ख़ुमैनी का आज्ञापालन करने का एलान किए जाने की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हुई। इस असवर पर वरिष्ठ नेता ने बल दिया कि “चुनाव में सबके भाग लेने से ईरान और व्यवस्था का सम्मान बढ़ेगा और उसका बीमा होगा।”
वरिष्ठ नेता ने चुनाव को ऐसा कर्तव्य बताया जिसमें सबको भाग लेना चाहिए। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि देश को आर्थिक क्षेत्र में मज़बूत बनाना मूल विषयों में शामिल है ताकि दुश्मन आर्थिक मार्ग से अपनी इच्छा न थोप सके।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्लामी क्रान्ति के शुरु से अब तक, भौतिकवाद की समर्थक सभी सरकारें इस्लामी व्यवस्था के ख़िलाफ़ थीं किन्तु वे कुछ बिगाड़ न सकीं। उन्होंने अर्थव्यवस्था व संस्कृति को नुक़सान पहुंचाने के दुश्मन के षड्यंत्र के संबंध में जनता में जागरुकता पर बल दिया और कहा कि दुश्मन की ओर से लापरवाही अच्छी चीज़ नहीं है क्योंकि दुश्मन जब दुश्मनी के ज़रिए कुछ नहीं बिगाड़ पाता तो वह दोस्ती के भेस में नुक़सान पहुंचाता है।


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