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ईरानी राष्ट्रपति:

मुसलमानों को धर्म और पैग़म्बर स. के पवित्र व्यवहार का पालनकरना चाहिए।

  • News Code : 727254
  • Source : एरिब.आई आर
Brief

राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने धर्म और पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पवित्र व्यवहार के पालन पर बल दिया है।

राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने धर्म और पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पवित्र व्यवहार के पालन पर बल दिया है।
उन्होंने रविवार को तेहरान में 29वें विश्व इस्लामी एकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बहुत दुख की बात है कि कुछ धार्मिक शिक्षा केन्द्र, जिन्हें धर्म और पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र व्यवहार का पालन करना चाहिए, मुक़ाबले बाज़ी और हिंसा फैलाने में लग गए हैं। राष्ट्रपति ने इस्लामी एकता सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि तकफ़ीर का स्रोत, वैचारिक हिंसा, रूढ़िवाद और चरमपंथ है। राष्ट्रपति ने कहा कि सभी आसमानी धर्मों को ग़ैर ईश्वरीय आदेश देने से बचना चाहिए। राष्ट्रपति हसन रूहानी ने बल दिया कि धार्मिक शिक्षा केन्द्रों के पाठ्यक्रम, एकेश्वरवाद और ईश्वरीय संदेश के आधार पर क्यों नहीं तैयार किये जाते? राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी स्थिति में ईदे मिलादुन्नबी (स) मनाई जा रही है कि जब विकास और प्रगति के लिए हर समय से अधिक आपके व्यवहार और नैतिकता की आवश्यकता है।
राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि किसी ज़माने में इस्लामी देशों को  इस्लाम के शत्रुओं के हमलों की चिंता थी लेकिन खेद की बात यह है कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि एक मुस्लिम देश दूसरे मुस्लिम देश पर हमला कर रहा है। राष्ट्रपति डॉ. हसन रूहानी ने कहा कि मुस्लिम देशों में एक गुट, धर्म या जेहाद के नाम पर दूसरे मुसलमानों के खिलाफ तलवार उठाता है और दुनिया के सामने पैग़म्बरे इस्लाम की हिंसक छवि पेश करता है। राष्ट्रपति ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि यह कभी सोचा ही नहीं जा सकता था कि ज़ायोनी शासन की ओर से मुसलमानों का ध्यान हट जाएगा, कहा कि एक गुट इस्लाम के नाम पर ईश्वर का झंडा लेकर मुसलमानों की जान के पीछे पड़ गया है और इस्लाम को हिंसक धर्म के रूप में पेश किया जा रहा है और कुछ लोगों ने इस्लाम को अत्याचार और हमलावर धर्म के रूप में पेश किया है और यह सब कुछ अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन के हित में है। ईरान के राष्ट्रपति ने बल देकर कहा कि निसंदेह हिंसा उस गुट के विचारों का परिणाम है जिसने इस्लाम को सही तरीके से नहीं समझा है और इस दिन से आश्रय, जब हिंसा और कट्टरपंथ, विचार से संवाद में बदल जाए।
राष्ट्रपति ने प्रश्न किया कि हिंसा कहां से पैदा हुई, दो साल पहले संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंसा और चरमपंथ के बारे में ईरान के प्रस्ताव की ओर संकेत किया और कहा कि हालांकि विविद रूप से सभी देशों ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी किन्तु अफ़सोस है कि प्रक्रिया स्वरूप कोई ऐसा क़दम नहीं देखा गया जिससे पता चलता है कि दुनिया के देश, हिंसा के खिलाफ संघर्ष के बारे में सद्भावना रखते हैं।

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