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अमरीकी चेतावनी के बावजूद भारत ईरान से संबंध बढ़ा रहा है।

  • News Code : 697075
  • Source : एरिब.आई आर
Brief

परमाणु वार्ता में अनिश्चितता की स्थिति के बावजूद भारत ने इस्लामी गणतंत्र ईरान से अपने संबंधों में विस्तार शुरू कर दिया है।

परमाणु वार्ता में अनिश्चितता की स्थिति के बावजूद भारत ने इस्लामी गणतंत्र ईरान से अपने संबंधों में विस्तार शुरू कर दिया है।
भारतीय मीडिया के अनुसार निकट अतीत में ईरान से तेल का आयाम कम करने के बाद भारत अब ईरान से अपने संबंध बढ़ाने में उत्सुक दिखाई दे रहा है और ईरान के माध्यम से भारत चाहता है कि अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया के देशों में उसकी पहुंच का रास्ता खुल जाए। भारत ने मई महीने में ईरान की दक्षिण पूर्वी स्ट्रैटेजिक चाबहार बंदरगाह को डेवलप करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए जबकि इस समझौते को लागू करने के लिए अभी एक वित्तीय समझौते की आवश्यकता है। नई दिल्ली सरकार का कहना है कि वह चाबहार बंदरगाह को कंटेनरों और बहुउद्देश्यीय मालवाहक जहाज़ों के लिए प्रयोग करना चाहती है। द हिंदू समाचार पत्र ने लिखा है कि भारत ने परमाणु समझौते से पहले ईरान के साथ व्यापारिक समझौतों के बारे में अमरीका की चेतावनी को नज़रअंदाज़ कर दिया है और भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर तथा ट्रान्सपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी ने ईरान का दौरा किया।
भारत उत्तर दक्षिण ट्रान्सपोर्ट कारीडोर में भी रूचि ले रहा है जिसमें पानी के जहाज़ों, रेलवे और सड़क का बहुत बड़ा नेटवर्क शामिल है। इस नेटवर्क के माध्यम से ईरान के माध्यम से मध्य एशिया और रूस को फ़ार्स खाड़ी से जोड़ा जाएगा। द हिंदू के अनुसार भारत जुलाई में कारीडोर से संबंधित बैठक में भाग लेगा। अख़बार के अनुसार भारत को आर्थिक और व्यापारिक संबंधों से ऊपर उठकर ईरान को देखना चाहिए और पूर्व कूटनयिक एमके भद्रकुमार के अनुसार अमरीका की लाइन पर चलने के कारण होने वाले नुक़सान की भरपाई के लिए भारत को दोहरी मेहनत करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के कारण भारत को ईरान से अपने संबंध प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।
द हिंदू के अनुसार भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अगले कुछ सप्ताह के भीतर ईरान की यात्रा करने वाली हैं लेकिन अभी भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ईरान यात्रा के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है।


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